महू। तमाम शिकवा शिकायतो के बाद एएसपी रूपेश कुमार द्विवेदी फार्म हाउस के कमर्शियल संचालन के विरूद्ध सख्त नजर आए। दरअसल देहात के बड़गोंदा थाना अंतर्गत निसर्ग वैली में कई फार्म एवं रिसोर्ट व होटलो का संचालन लम्बे समय से हो रहा है। यहां निजी शोक मोज के लिए बनाए गए फार्म हाउस को इनके मालिकों ने कमाई का जरिया भी बना लिया। एक तरह से दिन व रात की पार्टियों के लिए मोटा किराया वसूल इनका कमर्शियल संचालन भी नियमों के विरूद्ध किया जा रहा है। पुलिस को निसर्ग वैली के कई फार्म हाउस में आयोजित पार्टियों की शिकायत भी मिली है। पिछले दिनों भी ऐसा ही मामला पुलिस के संज्ञान में आया था जिसमें बर्थडे पार्टी के नाम पर रेव पार्टी की जारी थी। लिहाजा इस पूरे मामले में अब एएसपी रूपेश कुमार द्विवेदी गंभीर नजर आ रहे है। एक दिन पूर्व उन्होने अपने कार्यालय में निसर्ग वैली के तमाम फार्म हाउस संचालक की जमकर क्लास लेते हुए सख्त दिशा निर्देश जारी किये।
बैठक में एएसपी ने साफ शब्दों में कहा कि निजी फार्म का उपयोग व्यावसायिक तरीके से बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। इसके अवाला उन्होंने सख्त लहजे में यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति/समूहों को एक दिन के लिए किराए पर देने से पहले संबंधित थाने में लिखित सूचना दी जाए तथा आवश्यक अनुमति ली जाए। रात्रि में पार्टी आयोजन के समय ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं किया जाए। विशेष रूप से रात्रि दस बजे से प्रातः छह बजे तक और दिन में भी यह बिना अनुमति न हो। एएसपी ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में शराब पार्टी का आयोजन अवैधानिक है, यह ना हो और अगर ऐसा पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे सभी क्षेत्रों को कवर करते हुए लगवाए जाए तथा छह माह का स्टोरेज हो और पावर बैकअप हो इस बात भी विशेष ध्यान रखना अति आवश्यक है।
देपालपुर। जनपद पंचायत देपालपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मोहनलाल वर्मा ने गुरुवार को प्रशासनिक सेवा के 37 वर्षों की गरिमामयी यात्रा पूरी कर सेवानिवृत्ति प्राप्त की। उनके सम्मान में जनपद सभागार में आयोजित विदाई समारोह ने एक भावुक लेकिन गरिमामयी वातावरण का रूप ले लिया। दोपहर ढाई बजे आरंभ हुए कार्यक्रम का समापन देर शाम हुआ, जिसमें जनपद से जुड़ा हर वर्ग उनके स्नेह, सरलता और सेवाभाव का साक्षी बना।
जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि गुमानसिंह पंवार ने मंच से मोहनलाल वर्मा को भावभीनी विदाई देते हुए कहा कि वर्मा ने अल्प समय में भी जनपद की कार्यप्रणाली को नई दिशा दी। उनका कार्यकाल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से उल्लेखनीय रहा, बल्कि मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए भी याद किया जाएगा।
समारोह में जनपद सदस्य, ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और जनपद स्टाफ की उपस्थिति इस बात की साक्षी रही कि वर्मा ने केवल आदेश नहीं दिए, बल्कि हर किसी के साथ समन्वय बनाकर कार्य संस्कृति को नया आयाम दिया। सभी ने पुष्पमालाएं पहनाकर और शुभकामनाओं के साथ उनके योगदान को सलाम किया।
कार्यक्रम के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब पंचायत कर निरीक्षक सुभाष पटेल के आग्रह पर मोहनलाल वर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर उस रिश्ते को मंच पर सजीव कर दिया जो वर्षों से एक-दूसरे का संबल बना रहा। यह दृश्य सभागार में उपस्थित सभी जनों के लिए अविस्मरणीय बन गया।
सरपंच संघ की ओर से बलदेव पटेल ने वर्मा को सम्मानपूर्वक सफा बांधा। वहीं सचिव संघ अध्यक्ष मोहनलाल मकवाना ने स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके योगदान को चिरस्मरणीय बताया।
जनपदकर्मी राजेन्द्र खरे, जितेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र गांगले, पंचायत सचिव विक्रम नागर, रमेश वर्मा, भूपेंद्र मकवाना और योगेश शर्मा सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने वर्मा को सेवानिवृत्ति की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह के पश्चात भव्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सौहार्द और अपनत्व की भावनाएं परिलक्षित होती रहीं। मोहनलाल वर्मा की विदाई न केवल एक अधिकारी की सेवानिवृत्ति थी, बल्कि एक युग के अंत की तरह महसूस की गई—जिसमें सेवा, समर्पण और सजगता की मिसालें स्थापित हुईं।
देपालपुर। प्रथम जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान की अदालत में एक अनोखा और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया। देपालपुर तहसील के ग्राम भिडौता निवासी बादल और रितु, जो पिछले दो वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे और तलाक का प्रकरण न्यायालय में लंबित था, वे अंततः आपसी सुलह कर एक हो गए। दोनों की दो छोटी संतानें हैं, जो मां रितु के साथ रहकर पढ़ाई कर रही थीं। जब न्यायालय में दोनों के बीच आपसी मतभेद कम होने की संभावना दिखी, तो माननीय जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने यह मामला मध्यस्थता केन्द्र में भेजा। वहाँ प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं वरिष्ठ सिविल जज श्रीमती रिजवाना कौसर द्वारा की गई कुशल मध्यस्थता और समझाइश के फलस्वरूप, दोनों पक्षों ने आपसी वैचारिक मतभेद भुलाकर साथ रहने का निर्णय लिया।
आपसी सहमति से राजीनामा होने के बाद, न्यायालय परिसर में एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। माननीय न्यायाधीश ने न्यायालय के विश्राम कक्ष में, अधिवक्ताओं की उपस्थिति में, दंपती की पुत्री के हाथों दोनों को मिठाई खिलवाकर और मिठाई भेंट कर उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदा किया।
इस अवसर पर उभय पक्ष के अधिवक्ता श्री टी.आर. रघुवंशी, श्री प्रदीप पटेल सहित वरिष्ठ अधिवक्ता बी.आर. पटेल, सी.एस. जोशी एडवोकेट, संदीप ठाकुर, भरत पटेल और अन्य अधिवक्तागण भी उपस्थित रहे।
यह प्रसंग न केवल मध्यस्थता प्रक्रिया की सफलता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय केवल विवादों का निपटारा नहीं करता, बल्कि टूटते परिवारों को जोड़ने का भी सशक्त माध्यम बन सकता है।
सरकारी खजाना लुटा, जनता लूटी, अपराधी सत्ता के मंच पर
जीवन खारीवाल,पीथमपुर। पीथमपुर नगर पालिका परिषद अब शासन की इकाई नहीं, बल्कि अवैध कॉलोनाइजरों की सहूलियत की एजेंसी बन चुकी है। जिन कॉलोनाइजरों के खिलाफ खुद नगर पालिका ने एफआईआर दर्ज करवाई, उन्हीं के अवैध कब्जों पर अब सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं सरकारी पैसों से बनवाई जा रही हैं।
सेक्टर 1 से 3 तक की जमीनों पर बिना डायवर्जन, बिना टीएनसीपी अनुमति और बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के जो कॉलोनियां उग आई हैं, वे न तो वैधानिक हैं और न ही नियमानुसार विकसित। लेकिन वहां नगरपालिका करोड़ों रुपये खर्च कर विकास कार्य करवा रही है, जैसे इन अवैध कॉलोनियों को वैधता का वरदान देना ही परिषद की पहली प्राथमिकता हो।
नगरपालिका अध्यक्ष सेवंती बाई पटेल और उनके पति सुरेश पटेल की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे संदिग्ध और खतरनाक है। सुरेश पटेल खुद को ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ घोषित कर, हर मंच, हर बैठक और हर फाइल पर नजर रखते हैं। जबकि नियमानुसार इस पद का कोई अस्तित्व ही नहीं है। फिर भी फाइलों पर उनकी परछाई रहती है और मंचों पर उनकी उपस्थिति टिकी रहती है।
क्या नगरपालिका कार्यालय अब पारिवारिक दुकान बन चुका है? जिस तरह से सुरेश पटेल का हस्तक्षेप है, उससे ये स्पष्ट होता है कि पूरी परिषद उनके इशारों पर चल रही है।
विकास की आड़ में वैधता की लूट – यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, अपराध है
विकास कार्यों के नाम पर जिन कॉलोनियों में सड़क-नाली बन रही है, वे कॉलोनियां अब तक नगर पालिका को हैंडओवर भी नहीं की गई हैं। यानी न वहां की ज़िम्मेदारी नगरपालिका की है, न कोई वैधानिक अधिकार। इसके बावजूद वहां सरकारी धन की बौछार हो रही है।
इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि जिन लोगों पर एफआईआर दर्ज हो, उन्हीं को नगरपालिका फायदा पहुंचा रही है?
सिस्टम बिका हुआ है, विपक्ष गूंगा बना बैठा है
यह पूरा मामला सिर्फ सत्तापक्ष का नहीं। जब परिषद में कांग्रेस की बहुमत वाली परिषद और भाजपा के वरिष्ठ नेता एक जैसे चुप हैं, तो यह चुप्पी साज़िश की सहमति नहीं तो और क्या है?
पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी आत्मा बेच दी है। वरना करोड़ों के इस खुले खेल पर कोई तो सवाल उठाता।
कागजों में स्वीकृति – हर हस्ताक्षर पर गंधाता घोटाला
नगरपालिका की हर निर्माण प्रक्रिया सर्वे, प्रस्ताव, टेंडर और भुगतान से होकर गुजरती है। हर चरण पर नगरपालिका अध्यक्ष की मुहर लगती है। फिर अब यह कहना कि “हमें जानकारी नहीं थी”, सिर्फ नाटक और लीपापोती है।
हर विकास कार्य की फाइल अध्यक्ष की मेज से गुजरती है। हर भुगतान पर उनका अनुमोदन होता है। और यदि नहीं होता, तो बिना स्वीकृति करोड़ों खर्च कैसे हुए?
भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, लोकायुक्त जांच में फटेगा भयानक सच
यदि यह मामला लोकायुक्त या EOW की जांच के दायरे में आया, तो पीथमपुर नगरपालिका का काला सच उजागर होगा। सिर्फ लिप्त अधिकारियों और नेताओं की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि कई सालों की योजनाएं रद्द होंगी, विकास कार्यों के नाम पर की गई फर्जीबाड़ियों की परतें खुलेंगी, और जनता को ठगने वालों का असली चेहरा बेनकाब होगा।
सीएमओ की चौंकाने वाली टिप्पणी – क्या वे भी मजबूर या शामिल है, उन्होंने कहा “यदि अवैध कॉलोनियों में नगरपालिका ने विकास कार्य करवाए हैं तो यह मेरी जानकारी में नहीं है। जांच कराऊंगा।”
तो फिर सवाल ये है – अगर सीएमओ को नहीं पता, तो फाइलें किसने पास कीं? भुगतान किसने किया?
क्या अब यह मान लिया जाए कि पीथमपुर नगरपालिका में सत्ता की एक समानांतर सरकार काम कर रही है, जो फाइलों को नियमों से नहीं, रिश्तों से चलाती है?
अब वक्त है – पूरे सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई का
इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, एफआईआर, घोटाले में लिप्त अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बर्खास्तगी, और करोड़ों के इस खेल में शामिल ठेकेदारों, कॉलोनाइजरों और नेताओं की संपत्ति ज़ब्ती ही एकमात्र रास्ता है। वरना आने वाले वक्त में यह ‘पीथमपुर मॉडल’ पूरे प्रदेश के लिए भ्रष्टाचार का प्रतीक बन जाएगा।
देपालपुर। मंगलवार रात्रि लगभग 8 बजे जब नगर बरसात में भीग रहा था, तभी इंदौर ग्रामीण की नवागत पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने देपालपुर थाने का औचक निरीक्षण कर सभी को चौंका दिया। एसपी के अचानक पहुंचने से थाना परिसर में हड़कंप मच गया और मौजूद पुलिसकर्मी हड़बड़ी में सलामी देने लगे। निरीक्षण के दौरान एसपी भूटिया ने थाना रिकॉर्ड, लंबित प्रकरणों की स्थिति, शिकायतों के निराकरण रजिस्टर तथा अन्य व्यवस्थाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने टीआई कार्यालय को सुव्यवस्थित और अनुशासित पाकर संतोष व्यक्त किया। वहीं थाना परिसर के गार्डन की सफाई और रखरखाव को लेकर भी प्रसन्नता जताई। हालांकि निरीक्षण के समय कई पुलिसकर्मी ड्यूटी से नदारद पाए गए, जिस पर एसपी ने नाराजगी भी जताई और अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बरसते पानी में रात के समय किए गए इस औचक निरीक्षण ने पुलिस महकमे में चेतावनी का संदेश दिया है कि नई एसपी कार्यप्रणाली में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं होगी।
कालाकुंड पंचायत के उतेडिया गांव में बनी चोरल नदी की रपट से एक थार बह गई जिसमें तीन युवक सवार थे। स्थानीय सरपंच को सूचना मिलने के बाद उन्होने जानकारी थाना प्रभारी सिमरोल को दी। थाना प्रभारी के निर्देशन में सरपंच शिव दुबे और स्थानीय ग्रामीणों ने तीनों युवक और गाड़ी का सफल रेस्क्यू कर लिया। अल सुबह से ही समूचे अंचल में तेज बारिश का दौर जारी रहा जिससे नदी नाले उफान पर है। इंदौर से आए युवक तेज बहाव को समझ नहीं पाए और रपट से गाड़ी उतार दी जिससे थार नदी के पत्थरों में फंस गई। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया की ऊंचाई कम है जिससे बारिश में आवागम में परेशानियां होती है।
सोनोग्राफी और ईको जांच के लिए मिलेगी स्थायी सुविधा, “नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान के तहत दिलाई गई शपथ
देपालपुर। शासकीय बी.एस. महाविद्यालय, देपालपुर में शनिवार को श्री अरबिंदो अस्पताल, इंदौर एवं तहसील विधिक सेवा समिति, सिविल कोर्ट देपालपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक वृहद नि:शुल्क प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।
सुबह से जारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिकों ने शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा हजारों मरीजों की जांच की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 10:30 बजे हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में श्री अरबिंदो इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस, इंदौर के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विनोद भंडारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। डॉ. भंडारी ने अपने संबोधन में देपालपुर से पुराने आत्मीय संबंध साझा करते हुए यह घोषणा की कि अब सप्ताह में दो दिन शासकीय अस्पताल, देपालपुर में सोनोग्राफी एवं ईको जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही उन्होंने 30 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप के गठन की भी बात कही, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां और सेवाएं नियमित रूप से पहुंचाई जा सकें। शिविर में तहसील विधिक सेवा समिति देपालपुर के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान, एसडीएम श्री आर.एम. त्रिपाठी, एसडीओपी श्री संघप्रिय सम्राट और श्री अरबिंदो अस्पताल के सी.ओ.ओ. श्री राजीव सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल शिविर की व्यवस्थाएं संभालीं, बल्कि मरीजों से सीधा संवाद भी किया।
दिया प्रेरणादायक संदेश
जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि न्यायपालिका स्वास्थ्य शिविर क्यों आयोजित करती है, जबकि ‘न्याय सबके लिए’ का सिद्धांत यही बताता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय – ये सभी मौलिक अधिकार हैं और इन्हें हर वर्ग तक पहुंचाना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत
एसडीएम श्री आर.एम. त्रिपाठी ने इस शिविर को देपालपुर क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि एक नई दिशा में ठोस शुरुआत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकार के प्रयास लगातार किए जाएंगे ताकि ग्रामीण अंचलों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध हो सकें।
विशेषज्ञों की मौजूदगी और उन्नत जांच
शिविर में जनरल मेडिसिन, सर्जरी, त्वचा रोग, हड्डी रोग, स्त्री रोग और बाल रोग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सेवाएं दीं। साथ ही हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, ईको और सोनोग्राफी जैसी जांचें भी पूरी तरह नि:शुल्क की गईं।
“उम्मीदों वाली बस” बनी आकर्षण
कार्यक्रम में कैंसर स्क्रीनिंग के लिए मध्य भारत की पहली और अत्याधुनिक मोबाइल यूनिट ‘उम्मीदों वाली बस’ भी मौजूद रही। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम ने महिलाओं के लिए स्तन, सर्वाइकल और थायरॉइड कैंसर की जांच की। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को समय पर रोग पहचान और उपचार का अवसर प्राप्त हुआ।
“नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान के अंतर्गत सामूहिक शपथ
शिविर के दौरान प्रदेश में चल रहे “नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान के तहत उपस्थित नागरिकों को सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। एसडीओपी श्री संघप्रिय सम्राट द्वारा दिलाई गई इस शपथ में सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और समाज में भी इसके खिलाफ जनजागरूकता फैलाएंगे। इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि नशा समाज को खोखला करता है और इससे बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
व्यवस्था और सहभागिता बनी मिसाल
तेज बारिश के बावजूद आयोजन स्थल पर लोगों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता बढ़ रही है। शिविर में मरीजों के लिए समुचित बैठने, पंजीयन, जांच और परामर्श की व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन सुचारू रूप से हुआ।
यह शिविर केवल एक चिकित्सा आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की तरह था – जिसमें स्वास्थ्य को अधिकार और सेवा को धर्म माना गया। आयोजन में आई भीड़, सेवाओं की गुणवत्ता और वरिष्ठजनों की भागीदारी ने इसे देपालपुर के इतिहास में एक यादगार दिन बना दिया।
देपालपुर। मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेन्द्रसिंह राजपूत द्वारा देपालपुर ब्लॉक के सचिवों की सर्वसम्मति से श्री मोहनसिंह मकवाना को देपालपुर सचिव संघ का ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। श्री मकवाना की नियुक्ति को लेकर क्षेत्र में हर्ष का वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्री मनोज पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री गुमानसिंह पंवार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भारत पटेल, जनपद उपाध्यक्ष श्री मोहनलाल ननवाना ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। सचिव संघ के प्रदेश महामंत्री श्री रमेश वर्मा, जिलाध्यक्ष श्री गौरव जोशी, श्री भूपेन्द्रसिंह मकवाना, श्री निलेश पटेल, श्री बिल्लु नागर, श्री योगेश कड़लुवा, श्री राधेश्याम राठौर, श्री दीपक दुबे सहित अनेक सचिव साथियों ने श्री मकवाना को बधाई देते हुए संगठन के प्रति पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष श्री मोहनसिंह मकवाना ने सभी पदाधिकारियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की एकता, सचिवों की गरिमा और हितों की रक्षा के लिए सदैव सक्रिय रहेंगे।
देपालपुर। श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर बुधवार को देपालपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में शिव भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ‘सीहोर वाले’ के सानिध्य में आयोजित ऑनलाइन पार्थिव शिवलिंग अभिषेक में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शाम 7 बजे जैसे ही आस्था चैनल पर अभिषेक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, वैसे ही क्षेत्रभर के शिव भक्त घरों में पार्थिव शिवलिंग बनाकर अभिषेक में जुट गए। शिव भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों, मंदिरों और सामूहिक स्थलों पर पार्थिव शिवलिंग तैयार कर दूध, जल, बेलपत्र, पुष्प आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया। कहीं यह अनुष्ठान सामूहिक रूप से किया गया, तो कहीं घर की महिलाओं और बच्चों ने परिवारजनों के साथ मिलकर भक्तिभाव से अभिषेक किया। श्रद्धा और भक्ति का आलम यह था कि पूरे क्षेत्र में ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यां ’ की गूंज सुनाई दे रही थी।
छोटे-छोटे गांवों से लेकर नगर तक हर घर में शिव की आराधना की झलक दिखी। भक्तों ने यह आयोजन श्रद्धा, संकल्प और संयम के साथ पूर्ण किया। ऑनलाइन अभिषेक ने तकनीक के माध्यम से भक्ति को नई ऊंचाई दी और हजारों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में जोड़ दिया। श्रावण शिवरात्रि पर हुए इस अनूठे आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखते ही बन रहा था। लोगों ने पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए विधिविधान से पूजन और अभिषेक संपन्न किया। इस अवसर पर कई स्थानीय धार्मिक संस्थाओं ने भी शिव उपासना के आयोजन किए और शिवलिंग निर्माण की विधि का प्रशिक्षण देकर भक्तों को जोड़ा। कुल मिलाकर श्रावण मास की इस पुण्य तिथि पर देपालपुर सहित समूचे क्षेत्र में शिवभक्ति की अविरल धारा बहती रही।