महू। सर्व ब्राह्मण महिला मंडल किटी ग्रुप द्वारा शुक्रवार को चोपड़ा वाटिका में अभिनव होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में खाटू श्याम बाबा का दरबार सजाया गया तथा भजनों की आनंदमयी प्रस्तुति के बीच महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत एक से बढ़कर एक भजनों पर राधा संग गोपियों के रूप में महिलाओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। करीब 70 से अधिक महिलाओं की भागीदारी वाले इस तीन घंटे के कार्यक्रम में राधा-कृष्ण की मोहक जोड़ी और मैचिंग जोड़ी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जो समारोह का मुख्य आकर्षण रही।
मैचिंग जोड़ी प्रतियोगिता में रीना मुद्गल-आरती शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि नीता जोशी-मीनाक्षी जोशी द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं राधा-कृष्ण जोड़ी प्रतियोगिता में अंजली शर्मा-सोनाली शर्मा, नेहा शर्मा-कविता शर्मा तथा नीतू व्यास-प्रियंका शर्मा ने आकर्षक प्रस्तुति देकर सराहना प्राप्त की।
प्रतियोगिता की निर्णायक रंगीला महोत्सव समिति की शकुंतला विजयवर्गीय, रचना विजयवर्गीय, निर्मला यादव और ऊषा विजयवर्गीय रहीं। कार्यक्रम में समिति की अध्यक्ष डॉ. स्वर्णा दुबे, सचिव दीपा पाठक, आरती शर्मा, रीता उपमन्यु, शोभा व्यास, मधु दुबे, स्वाति शर्मा, अनीता शर्मा, नीता जोशी और मीनू जोशी सहित अन्य सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में रेनू शुक्ला और मधुमिता शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
आकाश राठौरमहू। आर्मी वॉर कॉलेज, महू द्वारा मुख्यालय सेंट्रल कमांड के तत्वावधान में बेरच्छा वाटरमैनशिप ट्रेनिंग एरिया में आयोजित “इंडियन आर्मी सेंट्रल कमांड सेलिंग रेगाटा” का समापन 6 मार्च को सुरम्य एवं शांत वातावरण में हुआ।
यह वार्षिक रेगाटा हायर कमांड कोर्स के जॉइंट कैप्सूल के दौरान आयोजित किया जाता है। प्रतियोगिता के 22वें संस्करण में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के कुल 77 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगियों ने नौकायन में उत्कृष्ट जलकौशल और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का प्रदर्शन किया।
इस आयोजन की तैयारियाँ फरवरी माह से शुरू हो गई थीं, जिनका समापन तीन दिनों तक चले प्रतिस्पर्धात्मक चरण के साथ हुआ। रेगाटा में एंटरप्राइज क्लास सेलिंग, कयाक सिंगल्स और कयाक डबल्स जैसी विभिन्न श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए गए। चुनौतीपूर्ण पवन और जल परिस्थितियों के बीच प्रतिभागियों ने अपनी तकनीकी दक्षता, शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का एक विशेष आकर्षण एमसीटीई के युवा अधिकारी कैडेट्स का अनुभवी प्रतिभागियों के साथ उत्साहपूर्वक प्रतिस्पर्धा करना रहा। रोमांचक मुकाबलों और अंतिम क्षणों तक चले संघर्षपूर्ण परिणामों ने प्रतिभागियों की कड़ी तैयारी और आयोजकों की सटीक योजना को भी दर्शाया।
आयोजन को और रोचक बनाने के लिए सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एडवेंचर कयाक और पैडल बोट रेस का भी आयोजन किया गया, जिसमें दर्शकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और प्रतियोगियों का उत्साहवर्धन किया।
समापन समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र जोशी, कमांडेंट इन्फैंट्री स्कूल; लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही, कमांडेंट आर्मी वॉर कॉलेज; मेजर जनरल गौतम महाजन, डिप्टी कमांडेंट एमसीटीई तथा मेजर जनरल जितेंद्र सिंह, डीन एफओएस एंड एल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता टीमों और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर अतिथियों ने प्रतिभागियों की खेल भावना की सराहना करते हुए कहा कि साहसिक खेल नेतृत्व क्षमता, आपसी समन्वय और मानसिक मजबूती को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महू। भारतीय डाक विभाग महू उपसंभाग द्वारा गुरुवार को नागरिकों की सुविधा के लिए ‘डाकघर आपके द्वार’ योजना के अंतर्गत चलित पार्सल पिकअप एवं पार्सल बुकिंग सेवा का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर डाक विभाग द्वारा शहर में जागरूकता रैली भी निकाली गई।
रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसमें डाक विभाग के कर्मचारियों ने घर-घर संपर्क कर लोगों को डाक विभाग की विभिन्न जनहितैषी योजनाओं तथा पार्सल से जुड़ी नई सुविधाओं की जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को डाक सेवाओं से अधिक से अधिक जोड़ना और पार्सल बुकिंग जैसी सुविधाओं को उनके घर तक पहुंचाना है।
रैली में डाक विभाग महू उपसंभाग के निरीक्षक कुलदीप शर्मा, महू पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर राजेश कुमार शर्मा, हेड पोस्टमैन प्रकाश चौधरी सहित महू पोस्ट ऑफिस के सभी पोस्टमैन और अन्य स्टाफ मौजूद रहे।
इस दौरान डाक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस सेवा के माध्यम से अब नागरिकों को पार्सल भेजने के लिए डाकघर आने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि डाक विभाग की टीम घर से ही पार्सल पिकअप कर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
महू। क्षेत्र में पिछले एक माह से अवैध रूप से संचालित आलू चिप्स कारखानों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। एसडीएम राकेश परमार के नेतृत्व में गुरुवार को कोदरिया और चोरडिया क्षेत्र में संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए नियमों के विरुद्ध चल रहे
8 कारखानों को बंद कराया। जांच के दौरान कुल 8 कारखाने नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, जिन पर तत्काल कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार… इन कारखानों में बिना अनुमति और तय मानकों का पालन किए उत्पादन किया जा रहा था।स्थानीय स्तर पर लगातार तार शिकायतें सामने आ रही थीं। इस मुद्दे को लेकर ‘पीपुल्स समाचार’ द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही थीं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से संचालित उद्योगों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
कारखानों द्वारा आलू चिप्स निर्माण के दौरान निकलने वाला केमिकलयुक्त दूषित पानी नालों में बहाया जा रहा था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही थी।
तीन लाख से अधिक का डायवर्शन टैक्स बकाया, राजस्व अमले ने की कार्रवाई
महू। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में बकाया राजस्व वसूली को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में सिमरोल तहसील टप्पा के ग्राम गोकन्या स्थित निसर्ग वैली फार्महाउस को महू एसडीएम राकेश परमार के निर्देशन में राजस्व अमले ने सील कर दिया।
बताया गया है कि निसर्ग वैली फार्महाउस पर डायवर्शन टैक्स के रूप में करीब 3 लाख 17 हजार रुपए की राशि बकाया थी। राजस्व विभाग द्वारा कई बार नोटिस और सूचना देने के बावजूद संबंधित पक्ष द्वारा बकाया राशि जमा नहीं की गई। इसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए फार्महाउस को सील करने की कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार विवेक सोनी, अपर तहसीलदार यशदीप रावत, पटवारी प्रमोद बरेलिया, पटवारी अमित कुमार सहित अन्य राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा।
चिप्स कारखानों का दूषित पानी नदी-नालों में पहुंचा, फैलने लगी घातक दुर्गंध
महू। जिस आशंका को लेकर ग्रामीण वर्षों से चेतावनी देते आ रहे थे, वही स्थिति एक बार फिर विकराल रूप लेती नजर आ रही है। कोदरिया-चौरड़िया क्षेत्र में संचालित आलू चिप्स कारखानों से निकलने वाला काला दूषित पानी नालों के माध्यम से अब क्षेत्रीय आकाश गंगा सरोवर नदी में पहुंचने लगा है। इसके बाद से कई गांव असहनीय दुर्गंध की चपेट में आना शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों की सुबह अब शुद्ध हवा के बजाय सड़ांध, जी मचलाने और घबराहट की शिकायतों के साथ हो रही है।
ग्राम नेउगुराड़िया सहित आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि कुछ लोगों के आर्थिक लाभ के लिए हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी की सड़न से वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। अगर जिम्मेदारों ने जल्द सुध नहीं ली तो गुजरखेड़ा, किशनगंज भी बूरी तहर से दूषित पानी व असहनीय दुर्गंध की चपेट में आ जाएंगे।
महज कागजों में सिमट गए नियम कारखानों को संचालन की अनुमति नहीं है, बावजूद 100 से अधिक कारखाने कोदरिया, चौरड़िया व इससे जुड़े इलाको में अस्थाई रूप से चल रहे है। लेकिन कहीं भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है, ना ही ईटीपी प्लांट (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था है और ना ही म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की मनाही के बावजूद कारखाना संचालकों ने दूषित पानी को क्षेत्रीय नालो में बहाकर सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती दी है। इसके बावजूद संबंधित विभागों, विशेषकर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दिखावें के गड्ढे, स्टार्च पहुंचा नालो में
शुरूआती दौर में प्रशासनीक सख्ती के चलते कारखाना संचालको ने दूषित पानी के स्टोरेज का हवाला देते हुए कारखाना परिसर में गड्ढे खोदे थे, लेकिन अब यह गड्ढे महज दिखावा साबित हो रहे है, क्योंकि आलू धुलाई और चिप्स पकाने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला काला दूषित पानी और स्टार्च अब नालो तक पहुंच चुका है, यही स्टार्च नालो में एकत्रित होकर काले गाढ़े पदार्थ का रूप ले रहा है, जिसकी सड़ांध से असहनीय दुर्गंध पूरे वातावरण को दूषित कर रही है। इनता ही नहीं काले दूषित पानी ने क्षेत्रिए नलकूप में पहुंचकर उन्हें भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है, आने वाले दिनों में स्थितियां और बिगड़ेगी। इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी और मॉनिटरिंग सवालो से घिरी है।
पुरानी मांग, हर साल दोहराता संकट
मांग पुरानी है, कैसे भी दूषित पानी को नालो में बहाने से रोका जाए, स्थितियां किसी से छिपी नहीं है, हर वर्ष जांच और सैंपलिंग की औपचारिकताएं होती हैं। पिछले वर्षों की सैंपल रिपोर्ट में भी स्पष्ट हुआ है कि काला पानी और उससे उत्पन्न दुर्गंध मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ जल जीवों के लिए भी घातक है। इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती के अभाव में कारखाना संचालकों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन स्थानीय ग्रामीण अब और नहीं सहेंगे। ग्रामीण स्तर पर विरोध अंदर ही अंदर उबाल पर है और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो स्थिति उग्र हो सकती है।
महू। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के विकासखंड महू, जिला इंदौर में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जातियों के सर्वे कार्य को लेकर समाज के वरिष्ठ जनों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वे की प्रक्रिया, उद्देश्य और क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता परिषद के शासी निकाय सदस्य विनोद मोहिने ने की। इस अवसर पर जोरावर सिंह, जगन नायक, मोहनलाल पटेल, जिला समन्वयक रुतुजा पहाड़े, विकासखंड समन्वयक आरती बर्वे सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने सर्वे कार्य को गंभीरता से लेते हुए सक्रिय सहभागिता का आश्वासन दिया।
बैठक में ऑफलाइन एवं ऑनलाइन सर्वे फार्म भरने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि विकासखंड क्षेत्र में जहां-जहां विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू समाज के परिवार निवासरत हैं, उन्हें चिन्हित कर शत-प्रतिशत सर्वे पूर्ण किया जाना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं और समाज प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी विचार किया गया।
अध्यक्ष मोहिने ने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए सटीक, पारदर्शी एवं पूर्ण सर्वे अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उपस्थित जनों से समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर सर्वे कार्य में सक्रिय सहयोग करने की अपील की, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।
महू। इस वर्ष होली का पर्व धार्मिक संयोग के चलते विशेष रहा। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण धुलेंडी पर्व एक दिन आगे बढ़ा दिया गया, जिसके चलते 4 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा। वहीं 2 मार्च की देर शाम पूरे अंचल में पारंपरिक विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ होलिका दहन संपन्न हुआ। मंदिरों और प्रमुख चौराहों पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
3 मार्च को महू शहर में गोपाल मंदिर से फाग यात्रा निकाली गई। यात्रा में श्रद्धालु ढोल-मांदल की थाप पर फाग गीत गाते हुए शामिल हुए। हालांकि धुलेंडी एक दिन आगे बढ़ने के कारण अपेक्षाकृत भीड़ कम रही, फिर भी रंग-गुलाल और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः प्रारंभ स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई। जगह-जगह नागरिकों ने रंग गुलाल उड़ाकर यात्रा का स्वागत किया।
आज हर्षोल्लास से मनेगा धुलेंडी पर्व
4 मार्च को जिले भर में धुलेंडी का पर्व पूरे उत्साह और सौहार्द के साथ मनाया जाएगा। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में सुबह से ही रंग-गुलाल का दौर शुरू होगा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पारंपरिक गीतों और संगीत के साथ एक-दूसरे को रंग लगाकर बधाई देंगे। बाजारों में पिचकारी, गुलाल और मिठाइयों की दुकानों पर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों द्वारा भी विभिन्न स्थानों पर सामूहिक रंगोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पुलिस प्रशासन का माकूल इंतजाम
होली और धुलेंडी पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। 3 मार्च को निकली फाग यात्रा के दौरान थाना प्रभारी राहुल शर्मा सहित पुलिस बल पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों और तंग गलियों में लगातार गश्त की गई। धुलेंडी के दिन भी विशेष चौकसी बरकरार रहेगी। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे आपसी भाईचारे और संयम के साथ पर्व मनाएं तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें।
महू। कोदरिया, चौरड़िया सहित आसपास के वे गांव, जिन्होंने ओडीएफ प्लस का दर्जा प्राप्त किया है, आज गंभीर विडंबना का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में संचालित अवैध आलू चिप्स कारखानों में कार्यरत सैकड़ों मजदूर प्रतिदिन खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इससे स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 2 अक्टूबर 2019 तक अधिकांश गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया था। इसके लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। दूसरे चरण में कई ग्राम पंचायतों ने ओडीएफ प्लस का दर्जा भी हासिल किया, जिसमें महू क्षेत्र की बड़ी ग्राम पंचायत कोदरिया सहित आसपास की पंचायतें शामिल रहीं।
कारखानों में शौचालय नहीं, मजदूर खुले में जाने को मजबूर
वर्तमान में खेतों में अस्थायी रूप से संचालित अधिकांश कारखानों में मजदूरों के लिए स्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। रोजाना बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर यहां काम कर रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वे खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इससे न केवल स्वच्छता की स्थिति बिगड़ रही है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव को ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है, तो पंचायत स्तर पर स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी जिम्मेदारी है। ग्राम पंचायत की स्वच्छता समिति द्वारा ऐसे कारखाना संचालकों को नोटिस जारी कर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनपद स्तर पर निगरानी आवश्यक ओडीएफ प्लस की मान्यता बनाए रखने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ शौचालय व्यवस्था और सतत निगरानी अनिवार्य है। ऐसे में जनपद पंचायत और जिला प्रशासन को संयुक्त निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि शीघ्र आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो ओडीएफ प्लस का दर्जा महज कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि कारखानों को स्वच्छता मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए, अन्यथा उनके संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए।