महू। कोदरिया, चौरड़िया सहित आसपास के वे गांव, जिन्होंने ओडीएफ प्लस का दर्जा प्राप्त किया है, आज गंभीर विडंबना का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में संचालित अवैध आलू चिप्स कारखानों में कार्यरत सैकड़ों मजदूर प्रतिदिन खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इससे स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 2 अक्टूबर 2019 तक अधिकांश गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया था। इसके लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। दूसरे चरण में कई ग्राम पंचायतों ने ओडीएफ प्लस का दर्जा भी हासिल किया, जिसमें महू क्षेत्र की बड़ी ग्राम पंचायत कोदरिया सहित आसपास की पंचायतें शामिल रहीं।
कारखानों में शौचालय नहीं, मजदूर खुले में जाने को मजबूर
वर्तमान में खेतों में अस्थायी रूप से संचालित अधिकांश कारखानों में मजदूरों के लिए स्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। रोजाना बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर यहां काम कर रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वे खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इससे न केवल स्वच्छता की स्थिति बिगड़ रही है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव को ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है, तो पंचायत स्तर पर स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी जिम्मेदारी है। ग्राम पंचायत की स्वच्छता समिति द्वारा ऐसे कारखाना संचालकों को नोटिस जारी कर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनपद स्तर पर निगरानी आवश्यक
ओडीएफ प्लस की मान्यता बनाए रखने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ शौचालय व्यवस्था और सतत निगरानी अनिवार्य है। ऐसे में जनपद पंचायत और जिला प्रशासन को संयुक्त निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि शीघ्र आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो ओडीएफ प्लस का दर्जा महज कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि कारखानों को स्वच्छता मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए, अन्यथा उनके संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
