Homeदेपालपुरलेटर पैड बना भ्रष्टाचार का हथियार

लेटर पैड बना भ्रष्टाचार का हथियार

जनपद पंचायत देपालपुर में आदेशों की धज्जियाँ – सचिव की करतूत उजागर, सीईओ ने भरी दहाड़

देपालपुर। जनपद पंचायत देपालपुर के कार्यालय में एक ऐसा घोटाला फूटा है जिसने पंचायत व्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। यह मामला किसी मामूली गलती का नहीं बल्कि सत्ता और कुर्सी के नशे में चूर उन अफसरशाहों की नंगी तस्वीर है जो आदेशों को पैरों तले रौंदकर अपने मनमाने खेल खेलते हैं। ग्राम पंचायत बेगन्दा के नाम से जारी लेटर पैड का गंदा खेल पूरे क्षेत्र में भूचाल ला चुका है। कहानी की शुरुआत तब हुई जब पूर्व सचिव राजन पटेल ने आवेदन देकर साफ किया कि जिला पंचायत इंदौर ने 3 सितंबर 2024 को आदेश जारी कर उन्हें ग्राम पंचायत जलोदियापंथ का प्रभार दिया था। पाँच सितंबर को उन्होंने बाकायदा प्रभार लिया, लेकिन महज़ एक महीने बाद 3 अक्टूबर को आदेश पलटा गया और प्रभार भारतसिंह सोलंकी के नाम कर दिया गया।

भारतसिंह सोलंकी पंचायत सचिव

यहीं से घोटाले का बीज बोया गया। नया सचिव पद पर बैठा और पुराना लेटर पैड उसकी जेब में औजार बन गया। 19 अगस्त 2025 को वह धमाका हुआ जिसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की थी। भारतसिंह सोलंकी ने राजन पटेल के नाम का वही लेटर पैड अपने हस्ताक्षर से इस्तेमाल कर डाला। सोचिए, जिस दस्तावेज को कार्यालय में जमा होना चाहिए था, वही दस्तावेज अब भ्रष्टाचार का हथियार बन गया। यह कदम न केवल कदाचार की श्रेणी में आता है बल्कि यह इस बात की भी गवाही है कि जनपद पंचायत में नियमों की लाश पर कुर्सियाँ सजाई जाती हैं। जब मामला खुला तो जनपद पंचायत ने आदेश जारी कर सोलंकी को लेटर पैड तत्काल जमा करने के लिए कहा। लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। चेतावनी पर चेतावनी, फोन पर दबाव और बार-बार निर्देश, फिर भी सचिव ने आदेशों की धज्जियाँ उड़ाकर लेटर पैड दबा रखा। सवाल यही उठ रहा है कि आखिर किस मकसद से इस लेटर पैड को छिपाया गया और कौन से सौदों और काले खेलों में इसका इस्तेमाल हो चुका है। सीईओ श्रीमती कुसुम मंडलोई ने जब मामला हाथ में लिया तो उनका आदेश पूरे जनपद पंचायत के गलियारों में बिजली बनकर गिरा। तीन दिन का वेतन काटने का ऐलान हुआ और अब निलंबन की तलवार सीधे सचिव की गर्दन पर लटक रही है। आदेश साफ है—दो दिन में लेटर पैड जमा करो, वरना पद से बाहर का रास्ता देखो। जनपद पंचायत के दफ्तरों में अब दहशत का माहौल है। कर्मचारी फुसफुसा रहे हैं कि अगर एक लेटर पैड पर इतनी बड़ी कार्रवाई हो सकती है तो आने वाले दिनों में बड़े घोटाले और भारी खेल कौन सा तूफ़ान लेकर आएँगे। लोग यह भी कह रहे हैं कि इस छोटे से मामले ने उस पूरे तंत्र की कलई खोल दी है जहाँ आदेशों को कचरे में फेंक दिया जाता है और लेटर पैड जैसे दस्तावेज़ व्यक्तिगत हथियार बन जाते हैं। आज सवाल यह है कि क्या जनपद पंचायत सचमुच भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है। क्या यहाँ पदों और प्रभार का मतलब केवल अपनी मर्जी से खेल खेलना है। और सबसे बड़ा सवाल—अगर आदेशों की धज्जियाँ उड़ाने वालों पर तुरंत गाज गिर सकती है, तो क्या बड़े अफसर और ताकतवर चेहरों पर भी यह डंडा चलेगा या फिर कार्रवाई सिर्फ छोटे मोहरों तक सीमित रह जाएगी।

“समीक्षा बैठक में अनुपस्थित पाए गए दो अधिकारी, सीईओ ने वेतन काटा”

जनपद पंचायत देपालपुर के सीईओ कुसुम मंडलोई ने 26 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री आवास, ई-केवाईसी एवं अन्य योजनाओं की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक में अनुपस्थित पाए जाने पर दो अधिकारियों पर कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार सेक्टर अधिकारी नरेश वर्मा, पंचायत समन्वय अधिकारी तथा विशाखा मौहासे, सहायक विकास विस्तार अधिकारी बैठक के दौरान कार्यस्थल पर मौजूद नहीं पाए गए और लोकेशन संबंधी जानकारी भी असत्य दी। इस पर दोनों अधिकारियों का एक-एक दिन का वेतन अवैतनिक कर दिया गया है। सीईओ ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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