राहत इंदौरी के शेर से खुलती हकीकत – “झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो…”
देपालपुर। मशहूर शायर राहत इंदौरी का शेर आज देपालपुर नगर परिषद पर सटीक बैठता है –
“झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो,
सरकारी ऐलान हुआ है सच बोलो।
घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है,
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो।”
नगर परिषद देपालपुर की कार्यप्रणाली देख जनता यही कहने को मजबूर है। क्योंकि यहां हकीकत में काम की जगह केवल कागज़ी घोषणाएं और दिखावा ही चल रहा है।
सीएमओ का ढोंग – पहले खुद का गिरेबान देखें
देपालपुर नगर परिषद के सीएमओ बहादुर रघुवंशी ने एमपीआरडीसी पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि तहसील रोड छह बत्ती चौराहे पर सड़क धंसने और गड्ढे बनने में निर्माण एजेंसी व ठेकेदार की गुणवत्ता हीन कार्यशैली जिम्मेदार है। लेकिन असली सवाल यह है कि सीएमओ खुद कितने ईमानदार हैं?
जनता का कहना है कि रघुवंशी साहब दफ्तर में बैठकर भाषण और बयानबाजी तो खूब करते हैं, लेकिन धरातल पर काम कराने की नीयत और मेहनत कहीं नजर नहीं आती।

सड़कों का हाल – गड्ढों में समाई विकास की बातें
देपालपुर के मुख्य मार्गों का हाल यह है कि तहसील रोड से लेकर छह बत्ती चौराहे, बेटमा नाका चौराहा, राजेंद्र सेठ की दुकान, मानसिंह सेठ की होटल, आईसीआईसीआई बैंक, महाकाल फर्नीचर, बैंक ऑफ इंडिया से लेकर चमन चौराहे तक जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे और दरारें बनी हुई हैं। इतना ही नहीं, सड़क के दोनों ओर ड्रेनेज की व्यवस्था शून्य है। मामूली सी बारिश में ही सड़कें कीचड़ से लथपथ हो जाती हैं और लोगों का गुजरना मुश्किल हो जाता है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी – आखिर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल नगर की जनता पूछ रही है कि नगर परिषद के जनप्रतिनिधि आखिर चुप क्यों हैं? क्या उन्हें नगर के मुख्य मार्ग की दुर्दशा दिखाई नहीं देती..? एमपीआरडीसी का घटिया काम निश्चित रूप से जिम्मेदार है, लेकिन नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी और चुप्पी उससे भी बड़ा अपराध है।
जनता का दर्द – केवल तनख्वाह से ईमानदारी नहीं चलती
नगरवासियों का साफ कहना है कि अगर सीएमओ बहादुर रघुवंशी तनख्वाह जितनी ईमानदारी से धरातल पर काम करें तो देपालपुर पूरे जिले में नंबर वन बन सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि नगर परिषद की पहचान अब सिर्फ गंदगी, अधूरे काम, टूटी सड़कें और लापरवाही बनकर रह गई है।
साफ है – देपालपुर नगर परिषद जनता के लिए विकास नहीं, बल्कि परेशानी और शर्मिंदगी का पर्याय बन गई है।