महू। कलेक्टर शिवम वर्मा के नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन के मार्गदर्शन में संचालित गंभीर नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए गंभीर नदी के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित लगभग 50 चयनित कुओं के जलस्तर का पूर्व मानसून सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है।
अभियान के अंतर्गत वाटरशेड टीम द्वारा चयनित कुओं का वर्तमान जलस्तर मापकर उसका अभिलेखीकरण किया जाएगा। आगामी वर्ष पूर्व मानसून अवधि में इन्हीं कुओं का दोबारा सर्वे कर जलस्तर की तुलना की जाएगी। इससे नाला ट्रेंचिंग, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच (सीसीटी), लूज बोल्डर चेक डैम, वृक्षारोपण एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों का भू-जल स्तर पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा।
प्रशासन का मानना है कि गंभीर नदी पुनर्जीवन अभियान केवल जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिणामों का प्रमाण आधारित मूल्यांकन कर भविष्य की रणनीति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। अध्ययन से प्राप्त आंकड़े आने वाले वर्षों में जल संरक्षण योजनाओं के निर्माण एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन में उपयोगी साबित होंगे।
जनपद पंचायत महू के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीराज दुबे ने वाटरशेड टीम को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक चयनित कुएं का जलस्तर, जीपीएस लोकेशन, फोटोग्राफ एवं अन्य आवश्यक जानकारियां वैज्ञानिक पद्धति से संकलित कर सुरक्षित रखी जाएं, ताकि भविष्य में सटीक तुलनात्मक विश्लेषण किया जा सके।
