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29 जुलाई की रात में बांग्लादेश की बॉर्डर पर छोड़ा रोहिंग्या मुसलमान को

  • भारत में दाख़िला कैसे मिला, दस्तावेज़ कैसे बने, और पीथमपुर तक कैसे पहुंचे।

पीथमपुर। औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर से हाल ही में पकड़े गए 10 बांग्लादेशी नागरिकों को 29 जुलाई की रात को उनके देश में भेज दिया गया है। 24 जुलाई को बांग्लादेशी नागरिको का मेडिकल टेस्ट के बाद उन्हें भारी सुरक्षा के बीच बॉर्डर पर ले जाने की कार्रवाई शुरू की गई। पल पल की अपडेट धार एसपी पुलिस अधिकारियों से लेते रहे। दरअसल, औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में वर्षों से रह रहे और फैक्ट्रियों में काम कर रहे 10 रोहिंग्या मुसलमानों को हाल ही में प्रशासन ने हिरासत में लेकर बांग्लादेश भेज दिया। इन सभी की पहचान और दस्तावेजों की सघन जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि ये लोग अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए थे और फर्जी पहचान के जरिए यहां रह रहे थे। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। दस्तावेजों की जांच में जब इनके पास वैध पासपोर्ट, वीजा या अन्य पहचान पत्र नहीं मिले, तो इन्हें हिरासत में लेकर दूतावासों से पुष्टि कराई गई। अधिकांश दस्तावेज बांग्लादेश के विभिन्न जिलों से जारी पाए गए। इसके बाद 30 जुलाई को इन्हें बीएसएफ की निगरानी में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद बॉर्डर तक ले जाकर सुरक्षित सीमा पार कराया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इन सभी को बांग्लादेश से भारत तक लाने में दलालों ने भूमिका निभाई थी। किसी के पास पासपोर्ट नहीं था, न वीजा, न किसी प्रकार की अधिकृत प्रविष्टि की अनुमति। पीथमपुर में वे फैक्ट्रियों और निर्माण इकाइयों में मजदूरों के रूप में काम कर रहे थे और कई के पास भारतीय श्रमिक पंजीयन और फर्जी आधार कार्ड तक मौजूद थे। यह पूरे सिस्टम में जड़े जमाए बैठे फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की ओर इशारा करता है।


पीथमपुर बगदून थाना क्षेत्र से भी तीन संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिनकी जांच अभी चल रही है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद इन्हें भी निष्कासित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार विदेशियों की पहचान और निष्कासन की यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।

सवाल उठने भी शुरू
10 बांग्लादेशियों को उनके देश भेजे जाने के बाद एक ओर जहां प्रशासनिक कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। अब यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आखिर इतने सालों तक ये विदेशी नागरिक यहां कैसे रह रहे थे। क्या ये सिर्फ बांग्लादेश से आए थे या रोहिंग्या मुसलमानों की भी घुसपैठ हुई थी?
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों को बांग्लादेश भेजा गया, वे कई वर्षों से यहां रह रहे थे। लेकिन इस बात की अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि वे भारत में किस बॉर्डर से दाखिल हुए और कैसे इंदौर होते हुए पीथमपुर पहुंचे? सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसी जानकारी नहीं होना या न लेना, खुद एक बड़ी चूक मानी जा रही है। पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में लगातार रहने और काम करने के लिए इन लोगों को दस्तावेज, पहचान, काम, रहने की जगह कैसे मिली — यह सवाल भी अब जांच का विषय बन गया है।


इसके अलावा कुछ प्रवासियों के पास भारतीय पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और मजदूरी रजिस्ट्रेशन तक पाए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इसमें स्थानीय दलालों, फर्जी दस्तावेज बनाने वालों और यहां तक कि कुछ ठेकेदारों की भी मिलीभगत हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला केवल बांग्लादेशियों तक सीमित नहीं है। बगदून थाना क्षेत्र में पकड़े गए रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या भी बढ़ सकती है। बगदून थाने में तीन रोहिंग्या मुसलमानों से पूछताछ जारी है। जिन्हें ने आज या कल में बांग्लादेश की बॉर्डर पर छोड़ा जाएगा। उनके दस्तावेजो सघन जांच चल रही है।
विशेष सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्या समुदाय की युवतियों द्वारा शहरों में घरेलू नौकर, मसाज पार्लर, यहां तक कि देह व्यापार जैसे अवैध धंधों में लिप्त होने की सूचनाएं अन्य शहरों से पहले ही सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी इस एंगल की जांच जरूरी हो गई है।


इधर, करीब आठ दिन पहले तीन थानों की पुलिस टीम विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ निर्वासित किए गए विदेशी नागरिकों को सीमा पार छोड़ने के लिए रवाना हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, किसी विदेशी नागरिक को देश से निकालने की कानूनी प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन का समय लगता है। दस्तावेजों की पुष्टि, दूतावास संपर्क और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित करना जटिल प्रक्रिया होती है।

और रोहिंग्या, पीथमपुर व अन्य क्षेत्रों में छिपे
अब पीथमपुर, इंदौर, धार सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशासन सतर्क हो गया है। जांच एजेंसियां यह मान रही हैं कि अभी भी कई विदेशी नागरिक, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या, पीथमपुर व अन्य क्षेत्रों में छिपे हुए हो सकते हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाना चाहिए और जहां कहीं भी फर्जी पहचान या संदिग्ध लोग दिखें, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई के बाद अब स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं। जिन बांग्लादेशियों को निर्वासित किया गया, वे वर्षों से यहां रह रहे थे, काम कर रहे थे और कुछ तो पहचान पत्रों के साथ स्थानीय मजदूर के रूप में पंजीकृत तक हो चुके थे। ऐसे में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर ये लोग भारत में दाख़िल कैसे हुए, किन रास्तों से होते हुए मध्यप्रदेश के इस औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचे और इतने साल तक बिना किसी संदेह के कैसे रह रहे थे?


स्थानीय सूत्रों की मानें तो कुछ विदेशियों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और मज़दूर रजिस्ट्रेशन तक उपलब्ध थे। यह स्थिति फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले नेटवर्क, स्थानीय दलालों, और कुछ श्रमिक ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। अब यह एक साधारण अवैध प्रवास का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े संगठित तंत्र की आहट देने लगा है। विशेष एजेंसियों को संदेह है कि पीथमपुर, इंदौर और धार जैसे औद्योगिक इलाकों में अभी भी कई विदेशी नागरिक छिपे हो सकते हैं, जिनके पास फर्जी पहचान है और वे सामान्य नागरिकों की तरह रह रहे हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड में है। हालांकि यह सवाल अब भी खुला है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों के रहने, काम करने और दस्तावेज़ बनवाने की प्रक्रिया अकेले संभव थी या इसके पीछे एक लंबा संगठित चैनल सक्रिय है?


देपालपुर पुलिस की दिनदहाड़े ‘रेड’ बनी सौदेबाजी का अड्डा – लाखों की जुए की रकम दबाई

देपालपुर। देपालपुर थाना क्षेत्र के बनेडिया और मुडला गांव के बीच एक खेत में दिनदहाड़े जुआ खेलते करीब दो दर्जन लोगों को पुलिस ने पकड़ा। कार्रवाई 24 से 25 जुलाई के बीच हुई। पुलिस टीम में हेड मोहर्रिर कन्हैयालाल, आरक्षक रवि तोमर, विरेन्द्र पटेल, सचिन, थाना मोबाइल का प्राइवेट ड्राइवर रवि और डायल 100 का ड्राइवर शामिल थे। मौके से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया — क्योंकि पूरा प्रकरण वहीं “सेट” कर दिया गया।

खेत किराए पर, मुखबिरी के लिए अलग भुगतान

जहां जुआ खेला जा रहा था, वह खेत भी मामूली नहीं निकला। जानकारी के अनुसार खेत मालिक को रोज़ ₹1000 का किराया दिया जाता है, साथ ही नाल कटाई के ₹4000 भी अलग से चुकाए गए थे। इस पूरे रैकेट की सूचना पुलिस तक पहुंचाने के लिए बनेडिया गांव निवासी नूर नामक युवक को ₹1000 मुखबिरी के तौर पर दिए जाते थे।

पकड़े, फिर छोड़े – पैसे लेकर दबा दिया मामला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिन में खेत पर दबिश दी गई थी और मौके पर लाखों की रकम बरामद हुई। सभी जुआरियों को पकड़ने के बाद पुलिसकर्मियों ने वहीं सौदेबाजी शुरू कर दी। लेन-देन कर अधिकतर लोगों को मौके पर ही छोड़ दिया गया और कोई विधिवत एफआईआर नहीं की गई। बाद में कुछ लोगों से दोबारा पैसों की मांग की जाने लगी, जिससे बात फैल गई।

टीआई रणजीत बघेल ने लिया संज्ञान – रोजनामचा में दर्ज की कार्रवाई

जब इस पूरे मामले की भनक थाना प्रभारी रणजीत बघेल को लगी, तो उन्होंने तत्काल सभी संलिप्त पुलिसकर्मियों को थाने तलब किया और कठोर पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ के बाद टीआई बघेल ने घटना को रोजनामचा में दर्ज करते हुए दस्तावेजी कार्रवाई की शुरुआत की है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या आगे इन पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच या निलंबन जैसी कार्रवाइयाँ होंगी?

पुलिस की साख पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने न केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जुआ किस तरह से खुलेआम और संरक्षित ढंग से चलाया जा रहा है। पुलिस की मिलीभगत और “मैनेजमेंट” की ऐसी घटनाएं आमजन के विश्वास को गहरा आघात पहुंचा रही हैं।

उच्चाधिकारियों की चुप्पी क्यों?

अब तक इस मामले पर किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। यदि त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो यह समझा जाएगा कि पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं मौन सहमति मौजूद है।

जवाबदेही तय होगी या फाइलों में दफ्न हो जाएगा मामला?
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार पुलिस महकमा अपने ही कर्मचारियों पर कठोर कदम उठाएगा या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी “इंटरनल सेटलमेंट” में सिमट जाएगा।

इनका कहना है:-

यह जानकारी मुझे भी प्राप्त हुई है। मैं स्वयं इस मामले की जांच कर रहा हूं। यदि प्राप्त जानकारी सत्य पाई जाती है, तो वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

— रणजीत बघेल, टीआई देपालपुर

सिमरोल थाना क्षेत्र के पर्यटन स्थलो पर बैरियर व सांकेतिक बोर्ड लगाए

महू। नवागत एसपी इंदौर ग्रामीण यांगचेन डोलकर भूटिया के निर्देशन पर सिमरोल थाना क्षेत्र के पर्यटक स्थलों पर डीएसपी उमाकांत चौधरी और थाना प्रभारी सिमरोल अमित कुमार के नेतृत्व में थाना स्टाफ द्वारा रेशिया कुंड, लोदिया कुंड,मंदादेव और कालाकुंड आदि स्थलों पर बेरिगेडिंग व रपट पुलियाओं पर सांकेतिक बोर्ड लगाए गए साथ ही जंगलों में प्रवेश पर प्रतिबंधात्मक आदेश का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है।

रतवी से कालाकुंड तक नदी पर बनी क्षतिग्रस्त पुलिया की मरमत हेतु सीईओ जनपद महू को पत्राचार कर अवगत करवाया गया। इंदौर एसडीओ को सावधानी संकेत लगाने व वनकर्मी को तैनात करने हेतु पत्र लिखा गया।

अंकित पेट्रोल पम्प को किया सील, बगैर हेलमेट दिया जा रहा था पेट्रोल

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महू। महू थाना अंतर्गत आने वाले महू सीमरोल रोड़ हरसोला फाटा स्थित अंकित पेट्रोल पम्प को बगैर हेलमेट पेट्रोल देने के मामले में सील कर दिया गया। साथ ही पम्प संचालक के विरूद्ध धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज करने के भी आदेश जारी किये गए है। यह कार्रवाई महू एसडीएम एवं तहसीलदार द्वारा संयुक्त रूप से की गई।

अंकित पेट्रोल पम्प को बगैर हेलमेट पेट्रोल देने के मामले में सील कर दिया गया।

दरअसल 1 अगस्त से प्रदेश के भोपाल एवं इंदौर शहर में बगैर हेलमेट पेट्रोल नहीं की तर्ज पर कलेक्टर द्वारा आदेश जारी किये गए है। यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद जारी किया गया। आदेश के परिपालन में सुबह से ही एसडीएम राकेश परमार और तहसीलदार विवेक सोनी विकासखंड स्तर पर भ्रमण कर पेट्रोल पम्पो को जायजा लेते नजर आए। इसी बीच उन्होने महू सिमरोल रोड़ के हरसोला फाटा स्थित अंकित पेट्रोल पम्प पर बगैर हेलमेट ग्राहको को पेट्रोल भरवाते हुए देखा। पम्प कर्मचारियों द्वारा भी बगैर किसी झिझक के दो पहिया वाहनों में पेट्रोल भरा जा रहा था। लिहाजा आदेश के उल्लंघन पर पम्प संचालक के विरूद्ध कोतवाली थाने में धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज करने के आदेश एसडीएम द्वारा दिये गए साथ ही पम्प  को सील कर मौके पर ही पंचनामा तैयार करवाया गया। इस दौरान उनके साथ तहसीलदार विवेक सोनी भी मौजूद थे।

दिन दहाड़े लूट करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार

महू। बड़गोंदा पुलिस ने दिन दहाड़े हुई लूट की घटना का खुलासा प्रेसवार्ता के मार्फत किया है। एएसपी रूपेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि 28 जून को ग्राम मेण के समीप तीन व्यक्तियों ने दीपक पिता महेश गावड़ 19 साल के साथ लूट की नियत से मारपीट कर लूट की घटना को अंजाम दिया था। मामले में बड़गोंदा पुलिस ने विवेचना कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्त में आए तीनों ही आरोपी आदतन अपराधी है। बड़गोंदा थाने में तीनों के खिलाफ पूर्व में कई अपराध दर्ज हो चुके है।

प्रेसवार्ता में थाना प्रभारी प्रकाश वास्कले ने बताया कि इस लूट के तीनों आरोपी बड़गोंदा थाना क्षेत्र के निवासी है। आरोपी गोलु पिता छगन 24 साल पर पूर्व के चार गंभीर प्रकरण दर्ज है। जबकि विकास पिता तोमरसिंह गिनावा 19 साल एवं घनश्याम पिता मानसिंह डावर 28 निवासी नाहरखोदरा पर कुल 6 प्रकरण दर्ज है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1500 रूपए नकद, चांदी की चेन एवं घटना में उपयोग की गई बाईक, लौहे की राड़, डंडा व कड़ा जब्त किया गया। 

दतोदा-कनाड़ सड़क मार्ग बदहाल,विभाग कुंभकर्णी नींद में

महू। जिले की बड़ी पंचायत दतोदा की सड़कों का हाल किसी से छुपा नहीं है,राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाला गांव का मुख्य सड़क मार्ग बद से बदतर हो चुका है।हालांकि 2 किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग के नवीन निर्माण की मंजूरी विभाग से मिल चुकी है पर अब तक टेंडर और अन्य प्रक्रिया बाकी है।इस मार्ग से स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे है।सड़क में बड़े- बड़े गड्ढे है जो पानी और कीचड़ से लबरेज है,जहां मोटरसाइकल और आम राहगीर को आवागमन में मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए मरमत कार्य को नजरअंदाज कर नवीन निर्माण का इंतजार कर रहे है।

नार्मदीय ब्राह्मण समाज, इंदौर इकाई के चुनाव निर्विरोध संपन्न

इंदौर। नार्मदीय ब्राह्मण समाज, इंदौर इकाई के चुनाव नार्मदीय मांगलिक भवन, द्वारकापुरी में सफलतापूर्वक एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। यह चुनाव निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से संपन्न हुए, जिसमें समाज की एकता और आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला।

चुनाव परिणाम निम्नानुसार रहे:

प्रफुल शर्मा को इंदौर इकाई अध्यक्ष के रूप में चुना गया।

अक्षय शर्मा को इंदौर इकाई सचिव का दायित्व सौंपा गया।

वर्षा शर्मा को महिला अध्यक्ष, इंदौर इकाई के रूप में चुना गया।

रोहित भट्ट को युवा इकाई अध्यक्ष, इंदौर इकाई नियुक्त किया गया।

इस अवसर पर महासभा चुनाव आयोग के चुनाव अधिकारी के रूप में एडवोकेट द्वय श्री तरुण पगारे एवम श्री पंकज सोहनी भी उपस्थित रहे एवं उन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी की।

कार्यक्रम में समाज की मातृशक्तियों, युवाओं एवं वरिष्ठ जनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। सभी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ दीं और वरिष्ठजनों ने आशीर्वाद प्रदान किया।

संगठित समाज ही सम्मान और समृद्धि का हकदार है साआ

महू। मनुष्य मात्र एक जीव नहीं एक सामाजिक प्राणी है समाज ही उसका जीवन, उसका विकास और उसकी पहचान है , यह जब समाज के बीच आकर लेते हैं तब समाज की शक्ति अनंत हो जाती है, संगठित समाज केवल बाहरी रूप से ही मजबूत नहीं होता है , बल्कि वह हर सदस्य को भावात्मक सुरक्षा संस्कृतिक गौरव और सामाजिक सम्मान की अनुभूति प्रदान करता है, संगठित समाज ही सम्मान और समृद्धि का हकदार है,
यह विचार चौरसिया समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारका चौरसिया ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटित कि

अध्यक्षता करते हुए सकल तंबोली समाज की राष्ट्रीय महामंत्री कीर्ति मोदी ने उद्बोधित किया कि आज हर समाज का व्यक्ती अपने खुद के स्वार्थ और उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, उन्हें समाज से कोई लेना देना नहीं है , इस समय ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने सहेजने और संवारने का काम करते हैं, इस से हम एक जुट होते हैं, हमारी पहचान मजबूत होती है व आवाज बुलंद होती है , विशेष अतिथि एडवोकेट वीरेंद्र पटेल सुशीला चौरसिया, व सतीश चौरसिया रहे।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत नीति चौरसिया, एकता चौरसिया, शिव चौरसिया अमितेश चौरसिया अनंत चौरसिया व अजय चौरसिया ने किया अतिथि परिचय एडवोकेट उमेश चौरसिया द्वारा दिया गया ,

अतिथियों द्वारा समाज के वरिष्ठों का सम्मान किया गया तथा समाज के युवाओं की सराहनीय सेवा व समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए सम्मानित किया एवं इस पर्व के आयोजन को सुषुप्त अवस्था से पुनर्जागरण की ओर ले जाने के सफल प्रयास कि सराहना की गयी एवं इसी प्रकार से निरंतरता रखने का आव्हान किया गया, युवाओं ने उक्त वचन पूर्ण करने सहृदय संकल्प लिया ,

प्रतिभावान छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु सोहन चौरसिया एवं राम चौरसिया द्वारा पृथक-पृथक अपनी-अपनी ओर से पुरस्कृत किया गया ,

समाज की गतिविधियों का विवरण आनंद चौरसिया द्वारा दिया गया व नाग पंचमी के महत्व को गायन के रूप में अंकेश चौरसिया व बबलू चौरसिया द्वारा बताया गया, प्रसिद्ध लेखक सुनील चौरसिया द्वारा अपने सारगर्भित विचार समाज के लिए रखे गए कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर संगीता चौरसिया व मीना चौरसिया द्वारा किया गया आभार प्रदर्शन सोहनलाल चौरसिया द्वारा व्यक्त किया गया।

कावड़ यात्रियों की दुर्घटना : घायलों का समुचित उपचार जारी, कलेक्टर आशीष सिंह ने दिए बेहतर इलाज के निर्देश

इंदौर। खंडवा रोड पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में घायल कावड़ यात्रियों का समुचित उपचार कराया जा रहा है। सभी घायलों की स्थिति अब सामान्य बताई गई है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल ध्रुव पिता सत्यनारायण (नंदन नगर) का इलाज बाम्बे अस्पताल में जारी है। प्रशासन द्वारा सभी घायलों के इलाज का खर्च शासकीय मद से वहन किया जा रहा है।

कलेक्टर आशीष सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और उपचार में किसी भी प्रकार की कोर-कसर नहीं होनी चाहिए। इस दुर्घटना में एक कावड़ यात्री आदर्श पिता संजय नाथ (राज नगर) की मृत्यु हो गई है। जिला प्रशासन द्वारा तत्काल सहायता के रूप में उनके परिजनों को रेडक्रॉस फंड से 50 हजार रुपये तथा एक अन्य मद से 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

 एसडीएम महू राकेश परमार ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। कुल 6 घायलों में से 5 यात्रियों जितेन्द्र पिता प्रेमनारायण (न्याय नगर), यश पिता संदीप (लालबाग), विकास पिता बाबूलाल (नंदन नगर), शुभम पिता सुरेश (नंदन नगर) तथा दुर्गेश पिता विजय (जय भवानी नगर) का इलाज एमवाय अस्पताल में किया जा रहा है। घायलों के उपचार पर जिला प्रशासन द्वारा निरन्तर जानकारी रखी जा रही है और आवश्यक सभी चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

आबकारी इंदौर द्वारा अवैध मदिरा के विरूद्ध की गई कड़ी कार्यवाही

इंदौर जिले में कलेक्टर आशीष सिंह और सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी के निर्देशन में अवैध मदिरा के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। आबकारी कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी और डिप्टी कंट्रोलर मनोज अग्रवाल के नेतृत्व में आबकारी विभाग इंदौर द्वारा अवैध मदिरा के विरुद्ध लगातार सख़्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ताज़ा कार्रवाई में विभाग की तीन टीमों ने अलग-अलग  वृत सांवेर , बालदा कॉलोनी (फूटी कोटी) और भोईमोहल्ला क्षेत्र में छापे मारकर कुल 326 पाव देसी मदिरा (58.26 बल्क लीटर), 1 पेटी विदेशी मदिरा और 2 पेटी देशी/विदेशी मदिरा जब्त की है। साथ ही दो दोपहिया वाहन (एक एक्टिवा, एक हीरो प्लेजर) भी ज़ब्त किए गए।

पकड़े गए आरोपी/अभियुक्तों में से एक महिला को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है, जबकि अन्य के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। पूरी बरामदगियों का करीब बाजार मूल्य 1 लाख 71 हजार 124 रुपए आँका गया है।

यह कार्रवाई आबकारी उप निरीक्षक त्रिअम्बिका शर्मा, मीरा सिंह, शालिनी सिंह एवं उनकी टीम की सतर्कता एवं समर्पण का परिणाम है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध मदिरा पर इस तरह के अभियान लगातार जारी रहेंगे।