400 केवी परियोजना में मुआवजे में भेदभाव का आरोप, किसानों ने एसडीएम हरिशंकर विश्वकर्मा को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्टर कुंदन करड़वाल
सांवेर। 400 केवी सिंगल सर्किट रूणिजा (बड़नगर)-इंदौर पारेषण लाइन परियोजना को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को भारतीय किसान संघ, जिला इंदौर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान तहसील कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के बाद नवागत एसडीएम हरिशंकर विश्वकर्मा को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी कि सभी प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिए बिना उनकी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि परियोजना का निर्माण कर रही रीन्यू ऊर्जा संचार प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मुआवजा वितरण में भेदभाव किया जा रहा है। कई किसानों की कृषि भूमि पर टॉवर फाउंडेशन, खुदाई और अन्य निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि अनेक प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ज्ञापन में बताया गया कि यह पारेषण लाइन विद्युत अधिनियम-2003 एवं भारतीय तार अधिनियम-1885 के तहत बनाई जा रही है। परियोजना की लाइन सांवेर तहसील के कछालिया, अजनोद, तराना, दर्जीकराड़िया, शहाना, मालीखेड़ी, हातुनिया, पटवाखेड़ी सहित कई गांवों की राजस्व सीमाओं से होकर गुजर रही है।
किसानों का कहना है कि कंपनी के अधिकारी 5 मई 2026 को तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी इंदौर द्वारा जारी आदेश का हवाला देकर किसानों पर निर्माण कार्य में सहयोग करने का दबाव बना रहे हैं। जबकि उसी आदेश में स्पष्ट रूप से प्रभावित किसानों का सत्यापन कर उन्हें नियमानुसार मुआवजा देने तथा संबंधित तहसीलदार को मुआवजा वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद कई किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
भारतीय किसान संघ ने ज्ञापन के माध्यम से सभी प्रभावित किसानों का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराने, पात्र किसानों को समान एवं नियमानुसार मुआवजा देने, मुआवजा वितरण में कथित भेदभाव की निष्पक्ष जांच कराने, भुगतान से पहले जबरन निर्माण कार्य नहीं कराने तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है।ज्ञापन सौंपने के बाद एसडीएम हरिशंकर विश्वकर्मा ने किसानों की समस्याएं गंभीरता से सुनते हुए मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
