महू। मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई), महू में ड्रोन हमलों, साइबर खतरों और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम से जुड़ी चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में बीएसएफ और पुलिस के अधिकारियों की भागीदारी रही, जहां ‘समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में कम लागत वाले व्यावसायिक ड्रोन के बढ़ते उपयोगकृनिगरानी, तस्करी और संभावित शस्त्रीकरणकृसे उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। खासकर शहरी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों की पहचान और ट्रैकिंग को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
काउंटर ड्रोन परिदृश्य पर चर्चा
एक सत्र में आधुनिक युद्ध, विशेषकर असममित युद्ध में ड्रोन के बढ़ते उपयोग और उनसे निपटने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। इसमें एकीकृत वायु रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और एआई आधारित तकनीकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। दूसरे सत्र में साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षमताओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से सूचना श्रेष्ठता हासिल करने पर विचार-विमर्श किया गया। एमसीटीई के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी, वीएसएम ने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ संस्थागत समन्वय भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सेना, बीएसएफ और पुलिस के बीच संयुक्त और बहु-एजेंसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। सेमिनार में ड्रोन-रोधी, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षमताओं के विकास, संयुक्त अभियानों को मजबूत करने और स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि भविष्य के बहु-क्षेत्रीय युद्ध की चुनौतियों के लिए देश पूरी तरह तैयार रह सके।
