कम स्टाफ में कराया जा रहा जोखिमपूर्ण काम, प्रशासनिक लापरवाही पर भड़के कर्मचारी
रतलाम / डॉ. अंबेडकर नगर (महू)। मालवा एक्सप्रेस के कोच मेंटेनेंस के दौरान इलेक्ट्रिक पावर विभाग का एक कर्मचारी 750 वोल्ट के करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद उसे तत्काल महू के अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में इंदौर रेफर किया गया। घटना ने रेलवे के इलेक्ट्रिक विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार 11 मार्च की रात मालवा एक्सप्रेस के कोच मेंटेनेंस का कार्य चल रहा था। इसी दौरान कार्य कर रहे कर्मचारी निप्पू कुमार अचानक 750 वोल्ट के करंट की चपेट में आ गए। करंट लगने से उनका बायां हाथ बुरी तरह झुलस गया और नसें तक क्षतिग्रस्त हो गईं। साथी कर्मचारियों और सुपरवाइजरों ने तुरंत उन्हें महू के गेटवेल हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल, इंदौर रेफर किया गया। रात करीब 9 बजे से उनका उपचार शुरू हुआ। डॉक्टरों के अनुसार हाथ में गहरा घाव है और पूरी तरह पहले जैसा ठीक होना मुश्किल हो सकता है।

डीआरएम ने जताई नाराजगी
घटना के बाद रतलाम मंडल के डीआरएम अश्वनी कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान ही फोन पर सीनियर डीईई (पॉवर) लेफ्टिनेंट धर्मेंद्र कुमार प्रजापति पर नाराजगी जताई और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए।
13 कर्मचारियों का काम, मौके पर केवल 5–6
हादसे के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि 750 वोल्ट लाइन पर कोच मेंटेनेंस जैसे जोखिमपूर्ण कार्य के लिए कम से कम 13 कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन मौके पर केवल 5 से 6 कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है और सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी हो रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार प्रशिक्षुओं को भी काम में लगा दिया जाता है, जबकि उनका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण लेना होता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
तकनीकी कर्मचारियों से कराई जा रही बाबूगिरी
मामले के बाद यह मुद्दा भी फिर उठने लगा है कि फील्ड में स्टाफ की भारी कमी के बावजूद कई तकनीकी कर्मचारियों को मंडल कार्यालय में बाबूगिरी में लगा रखा है। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों को अधिकारियों की मर्जी से फील्ड के कठिन कार्यों से दूर रखा गया है, जबकि बाकी कर्मचारियों से कम स्टाफ में ही जोखिमपूर्ण काम कराया जा रहा है।
चेंबर में बैठकर नहीं समझा जा सकता फील्ड का दर्द
कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि जब फील्ड में कर्मचारी कम संसाधनों और भारी जोखिम के साथ काम कर रहे हैं, तब वरिष्ठ अधिकारी चेंबर में बैठकर फील्ड की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं कर सकते। कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों को स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहिए, ताकि सुरक्षा और कार्य व्यवस्था में सुधार हो सके।
