Home Blog Page 4

जल भराव और जातिगत टिप्पणी से त्रस्त ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय में दी शिकायत, सचिव पर लगाया अभद्र भाषा और भेदभाव का आरोप

देपालपुर। जनपद की ग्राम पंचायत जलोडियापंथ के अनुसूचित जाति (एससी-एसटी) मोहल्ले के रहवासी मंगलवार को भारी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और क्षेत्र में लंबे समय से हो रहे जलभराव, गंदगी तथा जनप्रतिनिधियों की लापरवाही को लेकर शिकायती आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच बलदेव पटेल और पंचायत सचिव भारत सोलंकी द्वारा न तो जल निकासी की व्यवस्था की जा रही है, और न ही समय पर क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार शिकायत करने के बावजूद दोनों अधिकारी अपने कर्तव्यों से बचते रहे हैं, जिससे मोहल्ले में स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ते जा रहे हैं। जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने संज्ञान लेते हुए ज़िला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को निर्देशित किया कि वे मामले में तत्काल कार्यवाही करें। निर्देशों के पालन में ज़िला सीईओ ने जनपद पंचायत देपालपुर को दल गठित कर मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

सचिव पर जातिसूचक गालियों का आरोप

शिकायत में ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाए कि पंचायत सचिव भारत सोलंकी, जब भी किसी समस्या के लिए संपर्क किया जाता है, तो भद्दी-भद्दी टिप्पणियाँ करता है, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करता है, और गालियाँ देता है, जिससे क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से माँग की है कि जलनिकासी की तत्काल व्यवस्था की जाए और सचिव भारत सोलंकी के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्यवाही की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासन की त्वरित कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

वैदिक राखी निर्माण कार्यशाला में सर्व समाज की महिला प्रमुख हुई शामिल

महू। सर्व ब्राह्मण महिला मंडल द्वारा सर्व समाज के लिए वैदिक राखी बनाने की विधि सिखाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित कपिल शर्मा एवं अध्यक्षता सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित दिनेश शर्मा ने की। समाजसेवी शैलेन्द्र शुक्ल भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें सभी समाजों के प्रमुख महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी रही। पंडित कपिल शर्मा ने वैदिक राखी का महत्व, इसका इतिहास तथा इसे पहले किसे और क्यों बांधा गया, इसकी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वह कार्य कर सकती है जो देवता भी नहीं कर सकते, इसीलिए देवताओं ने भी नारी शक्ति की पूजा की है।

पंडित दिनेश शर्मा ने आयोजन के लिए सभी मातृशक्ति को बधाई दी। शैलेन्द्र शुक्ल ने राजा बलि और लक्ष्मी जी की कथा तथा द्रौपदी को भगवान कृष्ण द्वारा संकट से बचाने का प्रसंग सुनाया। कार्यक्रम में वैदिक राखी—चावल, सरसों, हल्दी और कपड़े से—बनाना सिखाया गया, जिसकी सभी सामग्री पंडित कपिल शर्मा द्वारा उपलब्ध कराई गई।

इस अवसर पर विभिन्न समाजों एवं महिला मंडल प्रमुखों का सम्मान किया गया, जिनकी संख्या 30 थी। सभी को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम में समाज की अध्यक्ष स्वर्णा दुबे, स्वाति शर्मा, रमा शर्मा, सुचिता महर्षि, दीप पाठक, आरती शर्मा, शोभा व्यास, निर्मला शर्मा, रीता उपमन्यु, लक्ष्मी शर्मा सहित अनेक वरिष्ठजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन निशा शर्मा एवं स्मृति दुबे ने किया तथा अंत में आभार आरती शर्मा द्वारा व्यक्त किया गया।

E-PAPER

0

विद्वत परिषद की बैठक हुई सम्पन्न

0

कार्तिक पूर्णिमा तक के उत्सव एवं तिथियां हुई निर्धारित

महू। विद्वत परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय काशी विश्वनाथ महादेव मंदिर पर सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा (मेण वाले) एवं महू विद्वत परिषद के अध्यक्ष पं.कपिल शर्मा (काशी महाराज) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। उक्त बैठक में रक्षा बंधन से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक के उत्सव की एक तिथि एक उत्सव सर्व सम्मति से निर्धारित किये गए एवं उक्त तिथियों का निर्धारण समस्त पंचागों और शास्त्र सम्मत, वेदोक्त किया गया। जिसमें सभी विद्वान आर्चायों ने एक तिथि निर्धारित की तथा भविष्य में किसी भी प्रकार का असमंजस न हो उसके लिए सभी मंदिरों पर उक्त तिथियों को प्रदर्शित किए जाने का निर्णय लिया गया।

उक्त बैठक में महू विद्वत परिषद के मार्गदर्शक, संयोजक पं. राजेश शास्त्री, सचिव पं. राजेश शर्मा, पं. अंकित शर्मा, समाजसेवी एवं ब्रह्म समाज के वरिष्ठ पं. शैलेन्द्र शुक्ला एवं समस्त परिषद के पदाधिकारीगण एवं विद्वान उपस्थित रहें। इस अवसर पर राम चरित्र मानस को जन जन तक मूल भावना के उद्देश्य से पहुँचाने के लिए पं. अंकित शर्मा का माला शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा, महू विद्वत  परिषद अध्यक्ष पं. कपिल शर्मा एवं वरिष्ठ समाज सेवी पं. शैलेंद्र शुक्ला ने सभी की सहमति से पं. नितेश महेंद्र कुमार शर्मा को सोशल मीडिया प्रमुख मनोनीत किया है नितेश शर्मा का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा एवं समस्त सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर वें परिषद की बात व धार्मिक तिथियों का प्रचार प्रसार करेंगे।

डीएफए शहडोल व डीएफए मंडला के बीच खिताबी भिड़ंत कल

0

हर दिन हो रहे मैच, हुनर के दम पर बालिकाएं बटोर रही वाहवाही

महू। मध्य प्रदेश फुटबॉल संघ के निर्देशन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग इंदौर तथा नैशनल फुटबॉल क्लब महू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सब-जूनियर अंतर जिला बालिका स्व. एस.आर. देव ट्रॉफी फुटबॉल प्रतियोगिता के पांचवें दिन दो रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले खेले गए।

प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में आर.एल. धाकड़ (नायब तहसीलदार महू), सतीश अग्रवाल (कार्यालय अध्यक्ष, छावनी परिषद महू), दिनेश शर्मा (अध्यक्ष, सर्व ब्राह्मण समाज महू), शैलेन्द्र शुक्ला, अंजनी जोशी, मुख्तार खान (पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर, होलकर कॉलेज) एवं गोपाल धवन उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों ने बालिका खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में श्री धाकड़ ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि “बालिकाओं को शिक्षा और खेल में संतुलन साधते हुए फुटबॉल के माध्यम से परिवार, जिले और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहिए।”

प्रतियोगिता में दो सेमीफाइनल मुकाबले खेले गए। प्रथम मैच डीएफए मंडला विरुद्ध कासा बड़वानी के मध्य खेला गया जिसमें एकतरफा मुकाबले में डीएफए मंडला ने 10-0 से विजयी होकर फाइनल में प्रवेश किया। दूसरा मैच डीएफए बालाघाट विरुद्ध डीएफए शहडोल के मध्य खेला गया जिसमें डीएफए शहडोल 5-1 से विजयी रही ओर फाइनल में प्रवेश किया आज 3 अगस्त को प्रतियोगिता का खिताबी मुकाबला डीएफए शहडोल विरुद्ध डीएफए मंडला के मध्य दोपहर 3 बजे से हाई स्कूल स्टेडियम महू में खेला जाएगा।

विधायक निधि से नवनिर्मित सड़क का गुजरखेड़ा में हुआ लोकार्पण

0

महू। ग्राम पंचायत गुजरखेड़ा के सीतानगर में विधायक निधि से बनाई गई नवनिर्मित सड़क का लोकार्पण शनिवार को क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा विधायक का हर्षोल्लास के साथ स्वागत सत्कार किया गया।

पूर्व सांसद प्रतिनिधि सुनील सुन्नू यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत गुजरखेड़ा के सुतारखेड़ी में उक्त सीसी सड़क निर्माण की मांग लम्बे समय से ग्रामीणों द्वारा की जा रही थी। जिसे विधायक के संज्ञान में लाने के बाद रूपए 6 लाख की राशि विधायक निधि से स्वीकृत होने उपरांत सड़क का निर्माण किया गया। ग्रामीणों को सीसी सड़क निर्माण की सैगात मिलने से क्षेत्र में हर्ष का माहोल है। शनिवार को सम्पन्न हुए लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान विधायक उषा ठाकुर कहा कि ग्राम पंचायत के विकास के लिए में सदैव तत्पर रहूंगी। इस दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष महेश यादव, ऐडवोकेड अशोक कौशल, हरजीत सिंह फेरी, ग्राम पंचायत सरपंच रानी मनीष लाखन, उप सरपंच गुन्नू यादव, पंच मनीष यादव, जितेन्द्र गोयल, रितेश वर्मा, महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रेरणा यादव, अप्पू पाटिल, पुलकित अग्रवाल, अजय परदेसी, आर सी यादव, अभिषेक कौशल, टानु कौशल, विशाल अग्रवाल, अजय परदेसी सहित अन्य मौजूद थे।

29 जुलाई की रात में बांग्लादेश की बॉर्डर पर छोड़ा रोहिंग्या मुसलमान को

  • भारत में दाख़िला कैसे मिला, दस्तावेज़ कैसे बने, और पीथमपुर तक कैसे पहुंचे।

पीथमपुर। औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर से हाल ही में पकड़े गए 10 बांग्लादेशी नागरिकों को 29 जुलाई की रात को उनके देश में भेज दिया गया है। 24 जुलाई को बांग्लादेशी नागरिको का मेडिकल टेस्ट के बाद उन्हें भारी सुरक्षा के बीच बॉर्डर पर ले जाने की कार्रवाई शुरू की गई। पल पल की अपडेट धार एसपी पुलिस अधिकारियों से लेते रहे। दरअसल, औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में वर्षों से रह रहे और फैक्ट्रियों में काम कर रहे 10 रोहिंग्या मुसलमानों को हाल ही में प्रशासन ने हिरासत में लेकर बांग्लादेश भेज दिया। इन सभी की पहचान और दस्तावेजों की सघन जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि ये लोग अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए थे और फर्जी पहचान के जरिए यहां रह रहे थे। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। दस्तावेजों की जांच में जब इनके पास वैध पासपोर्ट, वीजा या अन्य पहचान पत्र नहीं मिले, तो इन्हें हिरासत में लेकर दूतावासों से पुष्टि कराई गई। अधिकांश दस्तावेज बांग्लादेश के विभिन्न जिलों से जारी पाए गए। इसके बाद 30 जुलाई को इन्हें बीएसएफ की निगरानी में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद बॉर्डर तक ले जाकर सुरक्षित सीमा पार कराया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इन सभी को बांग्लादेश से भारत तक लाने में दलालों ने भूमिका निभाई थी। किसी के पास पासपोर्ट नहीं था, न वीजा, न किसी प्रकार की अधिकृत प्रविष्टि की अनुमति। पीथमपुर में वे फैक्ट्रियों और निर्माण इकाइयों में मजदूरों के रूप में काम कर रहे थे और कई के पास भारतीय श्रमिक पंजीयन और फर्जी आधार कार्ड तक मौजूद थे। यह पूरे सिस्टम में जड़े जमाए बैठे फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की ओर इशारा करता है।


पीथमपुर बगदून थाना क्षेत्र से भी तीन संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिनकी जांच अभी चल रही है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद इन्हें भी निष्कासित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार विदेशियों की पहचान और निष्कासन की यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।

सवाल उठने भी शुरू
10 बांग्लादेशियों को उनके देश भेजे जाने के बाद एक ओर जहां प्रशासनिक कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। अब यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आखिर इतने सालों तक ये विदेशी नागरिक यहां कैसे रह रहे थे। क्या ये सिर्फ बांग्लादेश से आए थे या रोहिंग्या मुसलमानों की भी घुसपैठ हुई थी?
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों को बांग्लादेश भेजा गया, वे कई वर्षों से यहां रह रहे थे। लेकिन इस बात की अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि वे भारत में किस बॉर्डर से दाखिल हुए और कैसे इंदौर होते हुए पीथमपुर पहुंचे? सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसी जानकारी नहीं होना या न लेना, खुद एक बड़ी चूक मानी जा रही है। पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में लगातार रहने और काम करने के लिए इन लोगों को दस्तावेज, पहचान, काम, रहने की जगह कैसे मिली — यह सवाल भी अब जांच का विषय बन गया है।


इसके अलावा कुछ प्रवासियों के पास भारतीय पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और मजदूरी रजिस्ट्रेशन तक पाए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इसमें स्थानीय दलालों, फर्जी दस्तावेज बनाने वालों और यहां तक कि कुछ ठेकेदारों की भी मिलीभगत हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला केवल बांग्लादेशियों तक सीमित नहीं है। बगदून थाना क्षेत्र में पकड़े गए रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या भी बढ़ सकती है। बगदून थाने में तीन रोहिंग्या मुसलमानों से पूछताछ जारी है। जिन्हें ने आज या कल में बांग्लादेश की बॉर्डर पर छोड़ा जाएगा। उनके दस्तावेजो सघन जांच चल रही है।
विशेष सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्या समुदाय की युवतियों द्वारा शहरों में घरेलू नौकर, मसाज पार्लर, यहां तक कि देह व्यापार जैसे अवैध धंधों में लिप्त होने की सूचनाएं अन्य शहरों से पहले ही सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी इस एंगल की जांच जरूरी हो गई है।


इधर, करीब आठ दिन पहले तीन थानों की पुलिस टीम विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ निर्वासित किए गए विदेशी नागरिकों को सीमा पार छोड़ने के लिए रवाना हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, किसी विदेशी नागरिक को देश से निकालने की कानूनी प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन का समय लगता है। दस्तावेजों की पुष्टि, दूतावास संपर्क और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित करना जटिल प्रक्रिया होती है।

और रोहिंग्या, पीथमपुर व अन्य क्षेत्रों में छिपे
अब पीथमपुर, इंदौर, धार सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशासन सतर्क हो गया है। जांच एजेंसियां यह मान रही हैं कि अभी भी कई विदेशी नागरिक, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या, पीथमपुर व अन्य क्षेत्रों में छिपे हुए हो सकते हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाना चाहिए और जहां कहीं भी फर्जी पहचान या संदिग्ध लोग दिखें, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई के बाद अब स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं। जिन बांग्लादेशियों को निर्वासित किया गया, वे वर्षों से यहां रह रहे थे, काम कर रहे थे और कुछ तो पहचान पत्रों के साथ स्थानीय मजदूर के रूप में पंजीकृत तक हो चुके थे। ऐसे में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर ये लोग भारत में दाख़िल कैसे हुए, किन रास्तों से होते हुए मध्यप्रदेश के इस औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचे और इतने साल तक बिना किसी संदेह के कैसे रह रहे थे?


स्थानीय सूत्रों की मानें तो कुछ विदेशियों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और मज़दूर रजिस्ट्रेशन तक उपलब्ध थे। यह स्थिति फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले नेटवर्क, स्थानीय दलालों, और कुछ श्रमिक ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। अब यह एक साधारण अवैध प्रवास का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े संगठित तंत्र की आहट देने लगा है। विशेष एजेंसियों को संदेह है कि पीथमपुर, इंदौर और धार जैसे औद्योगिक इलाकों में अभी भी कई विदेशी नागरिक छिपे हो सकते हैं, जिनके पास फर्जी पहचान है और वे सामान्य नागरिकों की तरह रह रहे हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड में है। हालांकि यह सवाल अब भी खुला है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों के रहने, काम करने और दस्तावेज़ बनवाने की प्रक्रिया अकेले संभव थी या इसके पीछे एक लंबा संगठित चैनल सक्रिय है?


देपालपुर पुलिस की दिनदहाड़े ‘रेड’ बनी सौदेबाजी का अड्डा – लाखों की जुए की रकम दबाई

देपालपुर। देपालपुर थाना क्षेत्र के बनेडिया और मुडला गांव के बीच एक खेत में दिनदहाड़े जुआ खेलते करीब दो दर्जन लोगों को पुलिस ने पकड़ा। कार्रवाई 24 से 25 जुलाई के बीच हुई। पुलिस टीम में हेड मोहर्रिर कन्हैयालाल, आरक्षक रवि तोमर, विरेन्द्र पटेल, सचिन, थाना मोबाइल का प्राइवेट ड्राइवर रवि और डायल 100 का ड्राइवर शामिल थे। मौके से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया — क्योंकि पूरा प्रकरण वहीं “सेट” कर दिया गया।

खेत किराए पर, मुखबिरी के लिए अलग भुगतान

जहां जुआ खेला जा रहा था, वह खेत भी मामूली नहीं निकला। जानकारी के अनुसार खेत मालिक को रोज़ ₹1000 का किराया दिया जाता है, साथ ही नाल कटाई के ₹4000 भी अलग से चुकाए गए थे। इस पूरे रैकेट की सूचना पुलिस तक पहुंचाने के लिए बनेडिया गांव निवासी नूर नामक युवक को ₹1000 मुखबिरी के तौर पर दिए जाते थे।

पकड़े, फिर छोड़े – पैसे लेकर दबा दिया मामला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिन में खेत पर दबिश दी गई थी और मौके पर लाखों की रकम बरामद हुई। सभी जुआरियों को पकड़ने के बाद पुलिसकर्मियों ने वहीं सौदेबाजी शुरू कर दी। लेन-देन कर अधिकतर लोगों को मौके पर ही छोड़ दिया गया और कोई विधिवत एफआईआर नहीं की गई। बाद में कुछ लोगों से दोबारा पैसों की मांग की जाने लगी, जिससे बात फैल गई।

टीआई रणजीत बघेल ने लिया संज्ञान – रोजनामचा में दर्ज की कार्रवाई

जब इस पूरे मामले की भनक थाना प्रभारी रणजीत बघेल को लगी, तो उन्होंने तत्काल सभी संलिप्त पुलिसकर्मियों को थाने तलब किया और कठोर पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ के बाद टीआई बघेल ने घटना को रोजनामचा में दर्ज करते हुए दस्तावेजी कार्रवाई की शुरुआत की है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या आगे इन पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच या निलंबन जैसी कार्रवाइयाँ होंगी?

पुलिस की साख पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने न केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जुआ किस तरह से खुलेआम और संरक्षित ढंग से चलाया जा रहा है। पुलिस की मिलीभगत और “मैनेजमेंट” की ऐसी घटनाएं आमजन के विश्वास को गहरा आघात पहुंचा रही हैं।

उच्चाधिकारियों की चुप्पी क्यों?

अब तक इस मामले पर किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। यदि त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो यह समझा जाएगा कि पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं मौन सहमति मौजूद है।

जवाबदेही तय होगी या फाइलों में दफ्न हो जाएगा मामला?
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार पुलिस महकमा अपने ही कर्मचारियों पर कठोर कदम उठाएगा या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी “इंटरनल सेटलमेंट” में सिमट जाएगा।

इनका कहना है:-

यह जानकारी मुझे भी प्राप्त हुई है। मैं स्वयं इस मामले की जांच कर रहा हूं। यदि प्राप्त जानकारी सत्य पाई जाती है, तो वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

— रणजीत बघेल, टीआई देपालपुर

सिमरोल थाना क्षेत्र के पर्यटन स्थलो पर बैरियर व सांकेतिक बोर्ड लगाए

महू। नवागत एसपी इंदौर ग्रामीण यांगचेन डोलकर भूटिया के निर्देशन पर सिमरोल थाना क्षेत्र के पर्यटक स्थलों पर डीएसपी उमाकांत चौधरी और थाना प्रभारी सिमरोल अमित कुमार के नेतृत्व में थाना स्टाफ द्वारा रेशिया कुंड, लोदिया कुंड,मंदादेव और कालाकुंड आदि स्थलों पर बेरिगेडिंग व रपट पुलियाओं पर सांकेतिक बोर्ड लगाए गए साथ ही जंगलों में प्रवेश पर प्रतिबंधात्मक आदेश का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है।

रतवी से कालाकुंड तक नदी पर बनी क्षतिग्रस्त पुलिया की मरमत हेतु सीईओ जनपद महू को पत्राचार कर अवगत करवाया गया। इंदौर एसडीओ को सावधानी संकेत लगाने व वनकर्मी को तैनात करने हेतु पत्र लिखा गया।

अंकित पेट्रोल पम्प को किया सील, बगैर हेलमेट दिया जा रहा था पेट्रोल

0

महू। महू थाना अंतर्गत आने वाले महू सीमरोल रोड़ हरसोला फाटा स्थित अंकित पेट्रोल पम्प को बगैर हेलमेट पेट्रोल देने के मामले में सील कर दिया गया। साथ ही पम्प संचालक के विरूद्ध धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज करने के भी आदेश जारी किये गए है। यह कार्रवाई महू एसडीएम एवं तहसीलदार द्वारा संयुक्त रूप से की गई।

अंकित पेट्रोल पम्प को बगैर हेलमेट पेट्रोल देने के मामले में सील कर दिया गया।

दरअसल 1 अगस्त से प्रदेश के भोपाल एवं इंदौर शहर में बगैर हेलमेट पेट्रोल नहीं की तर्ज पर कलेक्टर द्वारा आदेश जारी किये गए है। यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद जारी किया गया। आदेश के परिपालन में सुबह से ही एसडीएम राकेश परमार और तहसीलदार विवेक सोनी विकासखंड स्तर पर भ्रमण कर पेट्रोल पम्पो को जायजा लेते नजर आए। इसी बीच उन्होने महू सिमरोल रोड़ के हरसोला फाटा स्थित अंकित पेट्रोल पम्प पर बगैर हेलमेट ग्राहको को पेट्रोल भरवाते हुए देखा। पम्प कर्मचारियों द्वारा भी बगैर किसी झिझक के दो पहिया वाहनों में पेट्रोल भरा जा रहा था। लिहाजा आदेश के उल्लंघन पर पम्प संचालक के विरूद्ध कोतवाली थाने में धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज करने के आदेश एसडीएम द्वारा दिये गए साथ ही पम्प  को सील कर मौके पर ही पंचनामा तैयार करवाया गया। इस दौरान उनके साथ तहसीलदार विवेक सोनी भी मौजूद थे।