इंदौर। गणेशोत्सव के अवसर पर इंदौर में श्रद्धा और नवाचार का दुर्लभ मेल देखने को मिला। यहाँ किशोर गहलोत पिछले 20 वर्षों से अनाज से निर्मित गणपति बप्पा की स्थापना कर रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सरसों, मसूर, उड़द, रागी, मक्का, तिल, बाजरा, चावल सहित विभिन्न तिलहन और अनाजों से बप्पा का ऐसा स्वरूप गढ़ा है, जो किसानों को समर्पित है।
किशोर गेहलोत का कहना है कि यह गणपति रूप उन मेहनतकश हाथों को नमन है, जो धरती से अन्न उपजाकर पूरे विश्व का पेट भरते हैं। प्राकृतिक और कृषि-आधारित सामग्री से तैयार यह गणपति न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण-संरक्षण और किसानों के सम्मान का संदेश भी देता है।
मध्यप्रदेश को अन्न और तिलहन का भंडार कहा जाता है। यही प्रेरणा इस रचना में दिखाई देती है, जहाँ गणपति जी के स्वरूप में हरियाली और समृद्धि की छवि झलकती है। अशोक नगर, एयरपोर्ट रोड स्थित अपने निवास से किशोर गहलोत लगातार इस परंपरा को निभा रहे हैं। हर वर्ष वे एक नए रूप और नई थीम के साथ गणेशोत्सव को रचनात्मकता और सामाजिक संदेश से जोड़ते हैं।
स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं के अनुसार, यह पहल केवल धार्मिक आस्था का विस्तार नहीं, बल्कि किसानों के महत्व और उनके योगदान की याद दिलाने वाला एक जीवंत संदेश है। साथ ही, यह पर्यावरण-सम्मत पूजा पद्धति को भी प्रोत्साहित करता है, जिसमें मिट्टी और प्राकृतिक वस्तुओं का ही उपयोग होता है।
कला, भक्ति और सामाजिक सरोकार का यह अद्भुत संगम इंदौर के गणेशोत्सव को अलग पहचान देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है।