महू। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को आर्मी वॉर कॉलेज महू में आयोजित रण संवाद 2025 के दूसरे दिन युद्ध और तकनीक पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही भी मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि “भारत को किसी की जमीन नहीं चाहिए, लेकिन अपनी जमीन की रक्षा के लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों से ही नहीं होती, बल्कि वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और शिक्षकों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

रक्षा मंत्री मंगलवार रात महू पहुंचे और आर्मी वॉर कॉलेज में ठहरे। उन्होंने कहा कि रण संवाद केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि सुरक्षा, नीति-निर्माण और तीनों सेनाओं की रणनीति को मजबूत करने का एक अवसर है।
युद्ध का बदलता स्वरूप
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक दौर में युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैल चुका है। सैटेलाइट सिस्टम, ड्रोन, एंटी-सैटेलाइट हथियार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे साधन अब युद्ध की नई दिशा तय कर रहे हैं। यह युग नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर का है, इसलिए रणनीतियों को लचीला और समयानुकूल बनाना होगा।
भारतीय परंपरा और संवाद
उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में संवाद की कमी ही टकराव और शत्रुता का बड़ा कारण है। “भारतीय परंपरा में युद्ध और संवाद हमेशा जुड़े रहे हैं। युद्धकाल में भी संवाद का रास्ता खुला रखना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।”

रणनीतिक दृष्टिकोण को नई दिशा
रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि रण संवाद केवल अकादमिक चर्चा नहीं बल्कि भारत की सामरिक और कूटनीतिक सोच को नई दिशा देने वाला मंच है। यहां से निकलने वाले विचार भविष्य में भारत की रक्षा रणनीति और दीर्घकालिक कूटनीति को मजबूत करेंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल साही का संबोधन
लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की सैन्य तैयारियों को हर स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीकों को भविष्य की लड़ाइयों का अहम आधार बताया।
उन्होंने कहा कि “सैनिकों के मनोबल के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का संयोजन ही हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा।”