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प्रशासन की सख्ती के बीच महू के चिप्स उद्योग ने शुरू की नई तैयारी

पर्यावरणीय नियमों के पालन से बढ़ी लागत, लेकिन उद्योग सुधार की राह पर

ईटीपी और स्टोरेज टैंक की तैयारी में जुटे कारखाना संचालक

महू। महू विकासखंड के कोदरिया सहित आसपास के क्षेत्रों में संचालित होने वाले आलू चिप्स कारखानों को लेकर इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हालांकि इसे उद्योग जगत एक चुनौती के साथ-साथ सुधार के अवसर के रूप में भी देख रहा है। हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन किए बिना किसी भी कारखाने को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस निर्णय के बाद चिप्स कारोबार की राह निश्चित रूप से खर्चिली हो गई है, लेकिन कारखाना संचालकों का कहना है कि वे नियमों के अनुरूप उद्योग संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कच्चे माल का स्टोरेज कर अनुमति के इंतेजार में।

अनुमति की प्रक्रिया में जुटे संचालक

जिला एवं स्थानीय प्रशासन की संयुक्त बैठक में अपर कलेक्टर (एडीएम) रिंकेश वैश्य द्वारा निर्देश दिए गए थे कि दूषित पानी का निपटान केवल एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के माध्यम से ही किया जाए। निर्देशों के बाद शुरूआती चरण में लगभग दो दर्जन से अधिक कारखाना संचालकों ने अपने-अपने स्तर पर ईटीपी प्लांट की बुकिंग प्रारंभ कर दी है। साथ ही अपशिष्ट पानी के अस्थायी भंडारण के लिए बड़े गड्ढे खुदवाकर उन्हें स्टोरेज टैंक का स्वरूप दिया जा रहा है। इधर कुछ छोटे संचालक आर्थिक भार को देखते हुए प्रक्रिया का आकलन कर रहे हैं, लेकिन उनका भी कहना है कि वे नियमों का पालन करते हुए ही कारोबार करेंगे। कई संचालकों ने पहले ही कच्चे माल का स्टॉक कर लिया है और प्रशासनिक अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

औद्योगिक डायवर्जन बना नई चुनौती


प्रशासन ने भूमि का औद्योगिक डायवर्जन कराना भी अनिवार्य किया है। जिन संचालकों के पास निजी भूमि है, उन्होंने आवश्यक क्षेत्र का डायवर्जन करवा लिया है। वहीं किराए की कृषि भूमि पर कार्य करने वाले संचालकों के लिए यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल जरूर है, क्योंकि कृषि भूमि के औद्योगिक में परिवर्तन के बाद खेती संभव नहीं रहती। कारखाना संचालक अंकुर मित्तल का कहना है कि संचालक केवल उतने ही क्षेत्र का डायवर्जन करा रहे हैं, जहां भट्टी और मशीनरी स्थापित होगी। चिप्स सुखाने वाली खुली भूमि के संबंध में वे प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश की अपेक्षा कर रहे हैं।

सीमित समय में बड़ी तैयारी

कोदरिया क्षेत्र में पिछले एक दशक से अधिक समय से 150 से अधिक अस्थायी कारखाने फरवरी से मई तक संचालित होते रहे हैं। यहां निर्मित आलू चिप्स और सेव की मांग प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी रहती है। यह उद्योग स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में श्रमिकों को मौसमी रोजगार भी प्रदान करता है। हालांकि अपशिष्ट पानी की समस्या के कारण ग्रामीणों को पूर्व में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कारखाना संचालकों का कहना है कि वे पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए उद्योग को व्यवस्थित स्वरूप देना चाहते हैं। यदि प्रशासन आवश्यक मार्गदर्शन और समयबद्ध अनुमति प्रक्रिया सुनिश्चित करे, तो उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

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