अपशिष्ट नदी-नालों में बहाने की शिकायत पर प्रशासन अलर्ट, नहीं दी गई अब अनुमति

महू। प्रशासन की स्पष्ट मनाही के बावजूद नेउगुराडियां पंचायत अंतर्गत महू-सिमरोल रोड स्थित नीलकंठ फैक्ट्री में कच्चे आलू से चिप्स निर्माण किया जा रहा था। शिकायत मिलने पर नायब तहसीलदार राधावल्लभ धाकड़ के नेतृत्व में राजस्व अमले ने मौके पर पहुंच फैक्ट्री का निरीक्षण किया और बिना अनुमति संचालन पाए जाने पर फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक सुधांशु अग्रवाल से अनुमति पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं। दस्तावेजों के परीक्षण के पश्चात आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी तहर ग्राम भागेरा रोड़ पर रोशन सैनी द्वारा आलु चिप्स का कारखाना संचालित कर दुषित अपशिष्ट को खुले में बहाया जा रहा था। शिकायत पर टीम ने कार्रवाई करते हुए कारखाने को तत्काल बंद कराया।

उल्लेखनीय है कि महू जनपद अंतर्गत ग्राम कोदरिया, नेउगुराडियां एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रतिवर्ष फरवरी से जून तक चार माह के लिए अस्थाई आलू चिप्स कारखाने संचालित किए जाते हैं। इन कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट को सीधे नदी-नालो में बहा दिया जाता है, जिससे दर्जनभर गांव गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। पानी काले गाढ़े गाद में तब्दील हो जाता है, दुर्गंध फैलती है, नलकूप दूषित हो जाते हैं और जलजीवों के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन हालातों को देखते हुए इस वर्ष प्रशासन द्वारा अब तक किसी भी आलू चिप्स कारखाने को संचालन की अनुमति नहीं दी गई है।
जनपद ने पंचायत को दिए सख्त निर्देश
जनपद पंचायत महू ने 7 जनवरी को ग्राम पंचायत कोदरिया के सरपंच सतीष डॉवर, सचिव दयाशंकर आर्य एवं उपयंत्री सविता झरवड़े को पत्र जारी कर निर्देश दिए कि पंचायत क्षेत्र में संचालित सभी आलू चिप्स कारखानों में अपशिष्ट जल शोधन हेतु पृथक और प्रभावी ट्रीटमेंट प्लांट अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। यह भी स्पष्ट किया गया कि पूर्ण उपचार के बाद ही पानी का निष्कासन किया जाए। निर्देशों की अवहेलना या जनहानि की स्थिति में संबंधित कारखाना संचालक के साथ पंचायत स्तर पर भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
अपशिष्ट निष्पादन की व्यवस्था शून्य
क्षेत्र में वर्षों से अस्थाई कारखाने संचालित हो रहे हैं, लेकिन अपशिष्ट निष्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया कारखाना संचालकों द्वारा नहीं अपनाई जाती। खर्च से बचने के लिए दूषित अपशिष्ट खुले में बहा दिया जाता है, जिससे करीब 10 गांवों के हजारों लोग प्रभावित होते हैं। हर वर्ष निर्देश दिए जाने के बावजूद कारखाना संचालक नियमों की अनदेखी करते आए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा जल कांड के बाद प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है।
आलू और जलाउ लकड़ी का भंडारण जारी
कोदरिया सहित आसपास के क्षेत्र में 150 से अधिक अस्थाई कारखाने संचालित होते हैं। फरवरी की शुरुआत के साथ ही खेतों में अस्थाई ढांचे खड़े कर कच्चे आलू और जलाउ लकड़ी का भंडारण शुरू कर दिया गया है। प्रतिदिन छाटन आलू की बड़ी खेप क्षेत्र में पहुंच रही है। वहीं जलाउ लकड़ी के व्यापार में भी दलाल सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि बाहर से बिना टीपी जलाउ लकड़ी की गाड़ियां पहुंच रही हैं, एक टीपी पर दो से तीन गाड़ियों के आने की चर्चा है, जबकि वन विभाग की निगरानी फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।
