देपालपुर। क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर उजालिया गांव के पास बहने वाली जीवनरेखा मानी जाने वाली गंभीर नदी इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रही है। हालत यह है कि नदी में अब केवल कुछ गड्ढों (गढ़ों) में ही पानी बचा है, जबकि अधिकांश हिस्सा पूरी तरह सूख चुका है। मार्च के अंतिम सप्ताह में ही ऐसी स्थिति सामने आना आने वाले महीनों में गंभीर जलसंकट के संकेत दे रहा है।
लगातार बढ़ते तापमान और तेज धूप के कारण नदी की सतत जलधारा टूटने लगी है। पुलिया के सामने स्थित घाट, जो सालभर पानी में डूबा रहता था, अब पूरी तरह नजर आने लगा है। नदी तल की चट्टानें भी उजागर हो गई हैं, जिससे जलस्तर में आई भारी गिरावट साफ दिखाई दे रही है।
स्टॉप डैम बेअसर, नहीं ठहर पा रहा पानी
नदी के विभिन्न स्थानों पर जल संरक्षण के लिए बनाए गए स्टॉप डैम इस समय खुले होने के कारण पानी सीमित स्थानों पर ही रुक पा रहा है। जल प्रवाह बाधित होने से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नदी पूरी तरह सूखने की आशंका है।
भूजल स्तर गिरा, पंप होने लगे बंद
खडोतिया और बानियां खेड़ी गांव के किसान लखन सिंह दरबार (पटेल) और गोकुल सिंह पवार ने बताया कि नदी में पानी रहने से आसपास के कुएं और बोरिंग रिचार्ज होते थे, जिससे गर्मी में भी पानी की उपलब्धता बनी रहती थी। लेकिन अब नदी के सूखने से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई बोरिंग और पंप बंद हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल संरक्षण के ठोस उपाय किए जाएं और स्टॉप डैम का समुचित प्रबंधन किया जाए, ताकि शेष जल को बचाया जा सके। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा सकता है।
