ग्रामीणों में आक्रोश; एमपीआरडीसी पर गुणवत्ता और निगरानी में लापरवाही के आरोप
देपालपुर। देपालपुर से सांवेर को जोड़ने वाला लगभग 40 किमी लंबा प्रमुख मार्ग इन दिनों गंभीर तकनीकी खामियों और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बन गया है। करीब 78.66 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 34.8 किमी के सीमेंट कांक्रीट (सीसी) रोड में बनेडिया से अटाहेड़ा तक लगभग 12 किमी हिस्से में जगह-जगह चौड़ी दरारें उभर आई हैं। सड़क की सतह पर आई इन क्रैक लाइनों के कारण दोपहिया वाहन चालक लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, वहीं चारपहिया वाहन चालकों को भी आमने-सामने आने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

2018 में हुआ था भूमि पूजन, अब गुणवत्ता पर सवाल
इस मार्ग का भूमि पूजन वर्ष 2018 में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं सांसद सुमित्रा महाजन तथा क्षेत्रीय विधायक मनोज पटेल द्वारा किया गया था। इसके बाद एमपीआरडीसी (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) के तहत सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। करोड़ों की लागत से तैयार यह सीसी रोड क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जा रही थी, किंतु निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
तकनीकी खामियां: जॉइंट फेल्योर और सबग्रेड की कमजोरी?
स्थानीय जानकारों और ग्रामीणों के अनुसार सड़क की सीसी स्लैब में आए क्रैक्स यह संकेत दे रहे हैं कि या तो विस्तार-जॉइंट की तकनीकी मानकों के अनुरूप योजना नहीं बनाई गई या फिर सबग्रेड (नींव) की समुचित कॉम्पेक्शन नहीं की गई। परिणामस्वरूप तापमान परिवर्तन और भारी वाहनों के दबाव से स्लैब में दरारें विकसित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरचनात्मक ऑडिट नहीं कराया गया तो यह मार्ग और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है।
दो बार मरम्मत, फिर भी जस की तस स्थिति
एमपीआरडीसी द्वारा अब तक दो बार दरारों की मरम्मत का दावा किया गया, किंतु स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं दिख रहा। कई स्थानों पर सीमेंट की बजाय केवल गिट्टी डालकर अस्थायी ‘लिपापोती’ की गई, जो दो माह के भीतर ही उखड़ गई। खिमलावदा मार्ग से जैन मंदिर तक एक किमी के दायरे में भी सड़क की सतह उखड़ने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य तकनीकी मानकों के विपरीत और बिना दीर्घकालिक समाधान के किया गया।

इंजीनियर पर गंभीर आरोप
एमपीआरडीसी के इंजीनियर नवीन भगत पर ग्रामीणों ने लापरवाही और भ्रामक आश्वासन देने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से “जल्द डामरीकरण कार्य शुरू होगा” का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। विगत माह मार्गों को दुरुस्त करने के लिए लगाए गए बैनर भी अब औपचारिकता भर साबित हो रहे हैं।
दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा
दरारों से बचने के प्रयास में वाहन चालक कई बार विपरीत दिशा में मुड़ जाते हैं, जिससे आमने-सामने टकराव की आशंका बनी रहती है। दोपहिया वाहन सवार विशेष रूप से जोखिम में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार छोटी-मोटी दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विधायक मनोज पटेल और सांसद शंकर लालवानी ने अब तक सड़क की मरम्मत को लेकर ठोस पहल नहीं की। गांव के सरपंच प्रतिनिधि बाबूलाल पटेल, पूर्व सरपंच धर्मराज पटेल, पूनमचंद पटेल, महेंद्र पटेल, जमील पटेल, असलम पटेल, प्रकाश पटेल और बलराम पटेल सहित अन्य ग्रामीणों ने सड़क की शीघ्र उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए, निर्माण गुणवत्ता की जांच हो और यदि ठेकेदार या संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाएं तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थायी समाधान के तहत संपूर्ण क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण किया जाए।
